Fee Structure: सही तरीके से इस्तेमाल करने पर क्रेडिट कार्ड बहुत फायदेमंद हो सकते हैं. ये क्रेडिट हिस्ट्री बनाने, पेमेंट में आसानी और रिवॉर्ड, कैशबैक और ट्रैवल से जुड़ी चीजों में मदद करते हैं, लेकिन कई यूज़र्स कार्ड से जुड़े चार्जेज़ को पूरी तरह नहीं समझते, जिसका खामियाजा भुगतना पड़ता है.

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क्रेडिट कार्ड के कुछ छिपे हुए खर्च हैं, जो आपकी जेब पर असर डाल सकते हैं. क्रेडिट कार्ड के लिए अप्लाई करते समय लोग सबसे पहले जिस चीज़ पर ध्यान देते हैं, वह है सालाना फ़ीस. कुछ कार्ड जीवन भर के लिए मुफ़्त होने का दावा करते हैं, जबकि प्रीमियम कार्ड यात्रा से जुड़े फ़ायदों या रिवॉर्ड बेनेफ़िट्स के बदले हर साल कई हज़ार रुपये की फ़ीस ले सकते हैं.

उल्टा पड़ सकता है कार्ड चुनना 

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कई यूजर्स फीस माफ होने की शर्तों पर ध्यान नहीं देते हैं. कई कार्ड्स में सालाना फीस तभी माफ होती है, जब साल के दौरान खर्च एक तय सीमा से ज़्यादा हो. अगर खर्च का टारगेट पूरा नहीं होता है तो बाद में अपने-आप फीस लग जाती है. इसीलिए सिर्फ प्रीमियम दिखने वाले फायदों के आधार पर कार्ड चुनना उल्टा पड़ सकता है, अगर आपके असल खर्च करने के तरीके उस कार्ड की फीस को सही नहीं ठहराते हैं.

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क्रेडिट कार्ड खासतौर पर ATM से कैश निकालने के लिए नहीं बनाए गए हैं और बैंक आमतौर पर कैश एडवांस के लिए ज़्यादा चार्ज लेते हैं. एक बार जब कोई क्रेडिट कार्ड से कैश निकलता है तो तुरंत निकासी शुल्क लग जाता है. साथ ही ज़्यादा ब्याज भी देना पड़ता है. इस वजह से क्रेडिट कार्ड से कैश निकालना, कार्ड इस्तेमाल करने के सबसे महंगे तरीकों में से एक बन जाता है.

फाइनेंशियल प्लानर्स की सलाह के मुताबिक, क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल खासतौर पर पहले से तय डिजिटल ट्रांज़ैक्शन के लिए किया जाए, न कि एटीएम से इमरजेंसी में पैसे निकालने के लिए, जब तक कि बहुत ज़रूरी न हो.

सही जानकारी न होने से भी होता है नुकसान

दिलचस्प बात यह है कि क्रेडिट कार्ड से जुड़ी ज़्यादातर परेशानियां बेतहाशा खर्च करने से शुरू नहीं होतीं, बल्कि सही जानकारी न होने या समझ की कमी से शुरू होती हैं. अक्सर यूज़र्स यह नहीं समझ पाते कि कितनी तेज़ी से ब्याज बढ़ता है. वे छोटे-मोटे चार्ज पर ध्यान नहीं देते या ऐसे कार्ड चुन लेते हैं, जो उनके लाइफ़स्टाइल और खर्च करने के तरीकों से मेल नहीं खाते.

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सबसे सही तरीका यह है कि क्रेडिट कार्ड को एक्स्ट्रा पैसे के बजाय एक ऐसे शॉर्ट-टर्म पेमेंट टूल के तौर पर देखा जाए, जिसके लिए सोच-समझकर और समय पर पेमेंट करना जरूरी है.