नई दिल्ली: अगर आप अगले साल सोने के आभूषण ख़रीदने की योजना बना रहे हैं तो आपके लिए अच्छी ख़बर है. केंद्र सरकार ने देश में सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग अनिवार्य बनाने का फ़ैसला किया है. अगले साल 15 जनवरी से सरकार का फ़ैसला अमल में आ जाएगा लेकिन इसे पूरी तरह लागू करने के लिए एक साल का वक्त दिया जाएगा. इसका एलान आज केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने किया.

असली-नकली का पहचान करना होगा आसान

हॉलमार्किंग दुनिया भर में धातुओं से बने सामानों में उस धातु की मात्रा जानने का सबसे प्रामाणिक और सटीक तरीका माना जाता है. ऐसे में इसे अनिवार्य बनाए जाने से यह सोने के आभूषणों में सोने की मात्रा की सरकार की ओर से दी जाने वाली गारंटी बन जाएगा. इससे असली और नकली सोने के आभूषणों की पहचान करना आसान हो जाएगा. अब बीआईएस हॉलमार्किंग के निशान और नंबर के साथ-साथ आभूषणों पर निर्माता का नाम और कैरेट में सोने की शुद्धता लिखना भी ज़रूरी बनाया गया है. उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने एबीपी न्यूज़ से कहा- ''BIS द्वारा प्रमाणित किसी हॉलमार्क जांच केन्द्र पर सोने की शुद्धता की जांच हो सकेगी और स्वर्णाभूषण कारोबार में पारदर्शिता बढ़ेगी. इससे ग्रामीण और गरीब ठगी से बचेंगे और ग्राहकों द्वारा खरीदे गये गहनों की सही गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित होगी."

बीआईएस से रजिस्ट्री करवाना अनिवार्य होगा

बीआईएस यानि भारतीय मानक ब्यूरो कानून, 2016 के तहत केंद्र सरकार को सोने की हॉलमार्किंग ज़रूरी बनाने का अधिकार दिया गया था. सरकार के फ़ैसले के मुताबिक़ अब देशभर में सोने के आभूषण बेचने वाले ज्वैलर्स को बीआईएस से रजिस्ट्री करवाना होगा. रजिस्ट्री करवाने के बाद ज्वैलर्स केवल बीआईएस प्रमाणित किसी सेंटर से ही सोने की शुद्धता की जांच करवा पाएंगे. आभूषण निर्माता हॉलमार्क वाले आभूषण ही बेच पाएंगे. फ़ैसले की एक बड़ी बात ये है कि ये सोने की कलाकृतियों पर भी लागू होगा. वैसे तो ये फ़ैसला अगले साल 15 जनवरी से लागू हो जाएगा लेकिन सरकार ने इसे पूरी तरह लागू करने के लिए एक साल की छूट दी है ताकि बिना हॉलमार्किंग वाले पुराने आभूषणों को या तो बेच दिया जाए या फिर उनकी हॉलमार्किंग कर दी जाए.

हॉलमार्किंग फिलहाल अनिवार्य नहीं

फिलहाल भारत में सोने के आभूषणों पर हॉलमार्किंग की व्यवस्था तो है लेकिन उसे अनिवार्य नहीं बनाया गया है. अगर चाहे तो सोने के आभूषणों का कोई निर्माता भारतीय मानक ब्यूरो से अपने उत्पाद के लिए हॉलमार्किंग का अधिकार ले सकता है. फिलहाल देश के कुल आभूषण निर्माताओं में से केवल 10 फ़ीसदी ने ही अपने सोने की हॉलमार्किंग करवाई हुई है. फ़िलहाल देश में 26019 जौहरी ऐसे हैं जिन्होंने बीआईएस से पंजीकरण करवाया हुआ है. देश के 234 जिलों में ऐसे 877 सेंटर हैं जहां सोने की हॉलमार्किंग की जाती है. वैसे हॉलमार्किंग अनिवार्य करने की पहल क़रीब दो साल पहले शुरू हुई थी लेकिन अलग-अलग कारणों से इसमें देरी होती रही है.

भारत में सोने का बड़ा बाज़ार

भारत में सोने की बड़े पैमाने पर खपत होती है. 1982 में जहां देश में सालाना केवल 65 टन सोने की खपत थी, वहीं अब ये बढ़कर 800 टन से भी ज़्यादा हो गई है. इनमें से 80 फीसदी सोने की खपत घरेलू कामों में होती है. सोने की बीआईएस हॉलमार्किंग देश में अप्रैल 2000 से लागू है लेकिन इसे अबतक अनिवार्य नहीं बनाया गया था. बीआईएस हॉलमार्किंग का नया दिशानिर्देश 14 जून 2018 को जारी किया गया था.

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