MSME Export Loan Low Interest: केंद्र सरकार की ओर से 2 जनवरी को एक अहम फैसला लिया गया हैं. जिसकी सीधा असर देश के निर्यात पर पड़ने वाला हैं. वाणिज्य मंत्रालय की ओर से एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन (ईपीएम) के तहत दो नए कंपोनेंट लॉन्च किए गए हैं.

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सरकार अपने इस कदम से एमएसएमई सेक्टर को सस्ता एक्सपोर्ट क्रेडिट उपलब्ध करवाना, वैश्विक स्तर के बाजारों में सपोर्ट देना और उनकी लागत कम करना चाहती हैं. जिससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को फायदा होगा. आइए जानते हैं, सरकार के इस कदम के बारे में....

6 साल तक कम ब्याज पर मिलेगा एक्सपोर्ट लोन

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केंद्र सरकार की ओर से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्री और पोस्ट शिपमेंट एक्सपोर्ट क्रेडिट पर इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम लागू की गई है. यह योजना 2025 से 2031 तक चलेगी. जिस पर करीब 5,181 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इस योजना के तहत योग्य एमएसएमई को बाजार दरों से लगभग 2.75 फीसदी तक कम ब्याज पर लोन दिया जाएगा.

हालांकि, ब्याज की दर फ्लोटिंग होगी और रेपो रेट से जुड़ी रहेगी. ताकि आर्थिक हालात बदलने पर इसमें अपने आप बदलाव होता रहे. वैश्विक स्तर पर चल रही उथल-पुथल और अमेरिकी टैरिफ के बीच सरकार के इस फैसले से एमएसएमई सेक्टर को फायदा पहुंचने की उम्मीद की जा रही हैं. 

कम गारंटी में बैंक देगी लोन

सरकार ने निर्यात से जुड़े एमएसएमई की फंडिंग आसान बनाने के लिए कोलैटरल सपोर्ट फॉर एक्सपोर्ट क्रेडिट की शुरुआत की है. इसके तहत एमएसएमई को ज्यादा संपत्ति गिरवी रखे बिना या थर्ड पार्टी गारंटी के साथ बैंक लोन मिल सकेंगे.

योजना को CGTMSE के जरिए लागू किया जाएगा. अब तक पर्याप्त कोलैटरल न होने की वजह से एमएसएमई को ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज लेना पड़ता था. हालांकि, नई व्यवस्था से अब लोन सस्ते ब्याज दरों पर उपलब्ध होंगे. जिससे उत्पाद की लागत घटेगी और भारतीय सामानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी.

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