Gold vs Gold ETF: भारत में ज्यादातर निवेशक आज भी सोने को एक सुरक्षित निवेश के तौर पर देखते हैं. खासकर फिजिकल गोल्ड जैसे ज्वेलरी, सिक्के या बार के तौर पर निवेशक इन पर अपना दांव लगाते हैं. इसके पीछे की वजह सिर्फ निवेश नहीं है बल्कि परंपरा और वर्षों का भरोसा भी फिजिकल गोल्ड को खास बनाता है. 

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रिटर्न के आंकड़ों की बात करें तो, समय के साथ सोने ने अच्छा रिटर्न दिया है. India Bullion and Jewellers Association के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 15 सालों में सोने ने करीब 9 से 10 प्रतिशत सालाना और पिछले 10 सालों में लगभग 12 फीसदी का सालाना रिटर्न दिया है. जिसकी वजह से यह यह लोगों की पसंद बना हुआ है. फिजिकल गोल्ड के साथ-साथ गोल्ड ईटीएफ भी निवेशकों के बीच लोकप्रिय हो रहा है. आइए जानते हैं, इन दोनों विकल्पों के विषय में.

फिजिकल गोल्ड 

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फिजिकल गोल्ड खरीदते समय निवेशकों को मेकिंग चार्ज समेत अन्य बातों का ध्यान रखना होता है. कई ज्वेलरी पर मेकिंग चार्ज 25 प्रतिशत तक पहुंच जाती है. साथ ही इसे सुरक्षित रखना और इसकी शुद्धता को लेकर भी चिंता होती है.

बेचने के समय भी कई बार पूरी कीमत नहीं मिलती है. जिसके कारण निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ता है.

गोल्ड ETF

निवेशकों के लिए गोल्ड ईटीएफ में निवेश करना बहुत आसान है. वर्ष 2007 में शुरू हुए गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) ने सोने में निवेश के तरीके को काफी आसान बना दिया है. इसमें ये फंड शेयर बाजार में ट्रेड होते हैं. जिससे इन्हें खरीदना-बेचना आसान हो जाता है.

रिटर्न की बात करें तो लंबे समय में, यानी 10 से 15 साल के दौरान, गोल्ड ETF ने लगभग फिजिकल गोल्ड जैसा ही प्रदर्शन किया है. हालांकि, फंड मैनेजमेंट लागत के कारण रिटर्न थोड़ा कम हो सकता है. जो आमतौर पर 0.3 से 1 फीसदी के बीच होता है.

निवेशकों के लिए कौन सा विकल्प बेहतर

अगर कोई निवेशक लंबे समय तक निवेश करना चाहते हैं तो गोल्ड ईटीएफ एक बेहतर विकल्प हो सकता है. इसमें निवेश आसान और पारदर्शी होता है. फिजिकल गोल्ड की तुलना में रिटर्न भी करीब बराबर है. वहीं, अगर सोने के साथ भावनात्मक रिश्ता है या फिर किसी को गिफ्ट देने का प्लान हैं तो फिजिकल गोल्ड में निवेश किया जा सकता है.  

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