अगर आप सोने या चांदी में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो आपके लिए इनकी कीमतों में आई गिरावट को समझना बेहद जरूरी है. अगस्त में रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब पहुंचने के बाद दोनों कीमती धातुओं के भाव में बड़ी गिरावट देखने को मिली है. चांदी की कीमत अगस्त के पीक से करीब 56,000 रुपए प्रति किलोग्राम गिर गई है, जबकि सोना की कीमत भी अपने अगस्त के शिखर से करीब 23,000 रुपए प्रति 10 ग्राम नीचे आ चुकी है. ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल है कि आखिर सोने-चांदी की कीमतों में इतनी उथल-पुथल क्यों मची है?

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दरअसल, अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका, कच्चे तेल की महंगाई और वैश्विक तनाव जैसे कई कारण कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव डाल रहे हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि सोने-चांदी की कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट आने की क्या है वजह. 

अगस्त के पीक से कितनी गिरी सोने-चांदी की कीमत?

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  • चांदी की कीमत शुक्रवार के कारोबार में 6,800 रुपए प्रति किलोग्राम से गिरकर 1,92,800 रुपए पर पहुंच गई. यह दिसंबर 2025 के बाद इसका सबसे निचला पीक बताया गया है. 
  • अगस्त में चांदी की कीमत करीब 2,48,800 रुपए प्रति किलोग्राम के पीक पर थी. इस हिसाब से इनमें लगभग 56,000 रुपए की गिरावट आई है.
  • सोने की कीमत भी अगस्त के 1,64,773 रुपये प्रति 10 ग्राम के पीक से करीब 23,000 रुपये नीचे आ गई.
  • चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट से निवेशकों की चिंता बढ़ी है. वहीं, सोने में भी बिकवाली का दबाव बना हुआ है.

आखिर क्यों गिर रही हैं सोने-चांदी की कीमतें?

  • अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका: जब ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद होती है, तो निवेशक सोने-चांदी के बजाय ब्याज देने वाले निवेश ऑप्शनों की तरफ आकर्षित हो सकते हैं. इससे कीमती धातुओं की मांग पर दबाव पड़ता है.
  • बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी: अमेरिकी बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न बढ़ने पर सोने जैसे ऐसे निवेश विकल्पों की चाह कम हो सकती है, जिनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता.
  • कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है. ऐसे में तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है. इससे केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा रखने या बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं.

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