US-Iran War: ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है, लेकिन अब दोनों देशों के बीच दो हफ्तों के सीजफायर यानी युद्ध विराम की घोषणा ने ग्लोबल मार्केट में हलचल पैदा कर दी है. काफी लंबे समय से चल रहे तनाव के चलते पूरी दुनिया महंगाई और सप्लाई चेन की समस्याओं से परेशान थी, लेकिन अब इस फैसले ने राहत की उम्मीद जगा दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जैसे ही दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की खबर सामने आई, वैसे ही इसका सबसे बड़ा और पॉजिटिव असर कच्चे तेल के बाजार पर पड़ा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 13 प्रतिशत से 17 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है.

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इस घटनाक्रम में होमुर्ज स्ट्रेट की अहम भूमिका है, जो दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और LPG सप्लाई का प्रमुख रास्ता माना जाता है. ईरान के साथ तनाव की वजह से इस मार्ग पर खतरा बना हुआ था, लेकिन अब सीजफायर के बाद हालात सामान्य होने की उम्मीद ज्यादा बढ़ गई है. सप्लाई सुचारू होने से ऊर्जा की कीमतों में गिरावट आने लगती है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा और साथ ही इसका फायदा भारत जैसे देशों को भी मिलेगा जो अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करते हैं, उन्हें इससे सीधा फायदा मिल सकता है.

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आएगी गिरावट

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अगर हम भारत के नजरिए से देखें तो सबसे पहले राहत पेट्रोल-डीजल की कीमतों में देखने को मिल सकता है. लेकिन भारत में कीमतों में बदलाव तुरंत नहीं होता है, क्योंकि तेल कंपनियां टैक्स और पुराने घाटे को भी ध्यान में रखती हैं. अगर फिर भी, अंतरराष्ट्रीय कीमतें नीचे बनी रहती हैं तो अगले 7 से 10 दिनों में राहत मिल सकती है. यहीं नहीं बल्कि रसोई गैस यानी LPG के मोर्चे पर भी अच्छी खबर मिल सकती है.

ईरान के साथ चल रहे तनाव के कारण सप्लाई बाधित होने की वजह से LPG महंगी हो गई थी, जिसकी वजह से घरेलू और कर्मशियल सिलेंडरों के दाम बढ़ गए, लेकिन ताजा हालात को देखते हुए लगता है कि अगर आयात सस्ता हुआ तो घरेलू LPG सिलेंडरों के दाम घट सकते हैं. इससे होटल और ढाबों में खाने की चीजें भी सस्ती हो सकती है. 

ये सामान हो सकता है सस्ता!

  • पेट्रोल और डीजल
  • सब्जियां और फल
  • खाने का तेल
  • दालें
  • खाघ पदार्थ
  • स्मार्टफोन
  • लैपटॉप-पीसी
  • टीवी
  • फ्रिज
  • वॉशिंग मशीन
  • गाड़ियां
  • विदेश से आने वाले कपड़े

हवाई टिकटों के दाम में हो सकता है बदलाव

हवाई यात्रियों के लिए भी यह खबर राहत भरी हो सकती है. क्योंकि कच्चे तेल की कीमत कम होने से एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) सस्ता होता है, जो एयरलाइंस की लागत का बड़ा हिस्सा होता है. ऐसे में आने वाले समय में हवाई टिकटों के दाम कम होने की भी ज्यादा संभावना है. तेल की कीमतों में गिरावट का असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ता है. डीजल सस्ता होने से ट्रांसपोर्टेशन लागत कम होती है, जिससे सब्जियां, दूध, अनाज और अन्य जरूरी सामान सस्ते हो सकते हैं. इसके अलावा प्लास्टिक, पैकेजिंग, टायर और सिंथेटिक कपड़ों जैसी चीजों की लागत भी कम होने की उम्मीद है.

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि इन बदलावों का असर तुरंत नजर नहीं आता. सप्लाई चेन को सामान्य होने और नई कीमतों को लागू होने में 1 से 3 हफ्तों का समय लग सकता है. साथ ही, यह सीजफायर फिलहाल अस्थायी है. अगर यह स्थायी शांति में बदलता है और सरकार टैक्स में भी राहत देती है, तभी आम जनता को इसका पूरा फायदा मिल सकेगा.