अगर आप फ्लाइट से सफर करते हैं, तो आपने भी कई बार टिकटों की कीमतों में बड़ा अंतर देखा होगा. खासतौर पर त्योहारों और छुट्टियों के दौरान फ्लाइट टिकट के दाम अचानक बढ़ जाते हैं. कई बार एक ही रूट पर कुछ दिनों के अंतर से टिकट की कीमत में हजारों रुपए का फरक देखने को मिलता है. ऐसे में आम यात्रियों के लिए फ्लाइट का खर्च उठाना उनकी जेब पर भारी पड़ जाता है.

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इसी परेशानी को देखते हुए केंद्र सरकार फ्लाइट किरायों पर नजर रखने के लिए नए नियम बनाने की तैयारी कर रही है. इसका मकसद टिकट की कीमतों में होने वाली बेतहाशा बढ़ोतरी पर रोक लगाने के साथ एयरलाइंस को किराया तय करने की छूट देना भी है. हालांकि, सरकार हर समय टिकटों की कीमतों पर नियंत्रण नहीं लगाएगी. इसके लिए कुछ खास परिस्थितियां तय की जा सकती हैं.

क्या है सरकार की नई योजना?

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सरकार भारतीय वायुयान अधिनियम 2024 के तहत ऐसे नियम तैयार कर रही है, जिनसे जरूरत पड़ने पर फ्लाइट किरायों में बढ़ोतरी पर रोक लगाई जा सके. सरकार का फिलहाल सामान्य दिनों में फ्लाइट टिकटों की कीमतों पर सीधी सीमा लगाने का इरादा नहीं है.

हालांकि, प्राकृतिक आपदा या किसी बड़ी आपात स्थिति में जरूरत पड़ने पर किराये की अधिकतम सीमा तय की जा सकती है. इसका मकसद बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के साथ यात्रियों को असामान्य किराया बढ़ोतरी से राहत देना है.

एयरलाइंस को देने होंगे किराये से जुड़े विवरण

प्रस्तावित नियमों के तहत एयरलाइंस को अपनी किराया संरचना नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को एक महीने पहले देनी होगी. उन्हें यह जानकारी अपनी वेबसाइट पर भी दिखानी होगी. बड़ी बात यह कि इससे किराये में पारदर्शिता बढ़ाने और तय अधिकतम सीमा से ज्यादा पैसे वसूलने की घटनाओं पर नजर रखने में मदद मिल सकती है.

त्योहारों में क्यों बढ़ जाते हैं फ्लाइट टिकट के दाम?

त्योहारों और छुट्टियों के दौरान लोग ज्यादा सफर करते हैं, जिससे फ्लाइट टिकट के दाम महंगे हो जाते हैं लेकिन सीटें सीमित रहती हैं. इसके अलावा यह विमानन ईंधन (ATF) की कीमत, विमानों की उपलब्धता और परिचालन खर्च भी टिकट के दाम को भी प्रभावित करते हैं. ऐसे में सिर्फ किराये पर सीमा लगाने से सीटों की कमी दूर नहीं होगी.

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