FD vs RD vs SIP: नौकरी की पहली कमाई सिर्फ एक सैलरी नहीं, बल्कि यह आपके वित्तीय सफर की शुरुआत होती है. यही वह समय होता है जब आपके द्वारा लिए गए छोटे-छोटे फैसले भविष्य की आर्थिक स्थिति पर बड़ा असर डाल सकती हैं. लेकिन ज्यादातर लोग पहली सैलरी आते ही शॉपिंग, घूमने-फिरने या अन्य खर्चों में पैसा लगा देते हैं. एक्सपर्टों के मुताबिक अगर शुरुआत से ही बचत और निवेश की आदत डाला जाए, तो लंबे समय में बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है.
हालांकि किसी भी निवेश की शुरुआत करने से पहले एक मजबूत इमरजेंसी फंड तैयार करना बेहद जरूरी है. इसके बाद आप अपनी जरूरत के मुताबिक FD, RD या SIP जैसे ऑप्शनों को चुन सकते हैं.
सबसे पहले बनाएं इमरजेंसी फंड
निवेश से पहले कम से कम 3 से 6 महीने के जरूरी खर्चों के बराबर रकम को अलग रखना बेहद जरूरी है. इस पैसे को आप ऐसी जगह रखें जहां किसी इमरजेंसी में आप आसानी से निकाल सकें. आमतौर पर नौकरी छूटने, मेडिकल इमरजेंसी या किसी दूसरे जरूरत के समय यह पैसा आपके बेहद काम आ सकता है. क्योंकि इमरजेंसी फंड हमेशा आपको अचानक आने वाले खर्चों से निपटने में काफी मदद करती है.
FD, RD या SIP किसके लिए है बेहतर ऑप्शन?
FD के फायदे
अगर आपके पास एकमुश्त रकम मौजूद है और आप बिना किसी जोखिम के निवेश करना चाहते हैं, तो फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) आपके लिए बेहतर ऑप्शन साबित हो सकता है.
- निवेश पर तय ब्याज मिलता है.
- इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ता.
- कम जोखिम पसंद करने वालों के लिए यह बेहतर है.
- शॉर्ट टर्म लक्ष्यों और इमरजेंसी सेविंग्स के लिए इस्तेमाल.
RD के फायदे
रिकरिंग डिपॉजिट (RD) उन लोगों के लिए ज्यादा फायदेमंद है जो हर महीने एक निश्चित रकम बचा सकते हैं.
- छोटी रकम से निवेश की शुरुआत की जा सकती है.
- नियमित बचत की आदत बनती है.
- इसमें निश्चित रिटर्न मिलता है.
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SIP के फायदे
अगर आपका मकसद निवेश से भविष्य में एक बड़ा फंड तैयार करना है, तो आपके लिए SIP एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. SIP के जरिए आप म्यूचुअल फंड में भी नियमित निवेश कर सकते हैं.
- कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है.
- लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद होती है.
- इसमें आप छोटी रकम से शुरुआत कर सकते हैं.
- रिटायरमेंट, घर खरीदने या बच्चों की शिक्षा जैसे बड़े लक्ष्यों के लिए फायदेमंद है.
सैलरी मिलते ही अपनाएं 50:30:20 नियम
- 50% आय जरूरी खर्चों के लिए
- 30% रकम लाइफस्टाइल और व्यक्तिगत जरूरतों के लिए
- 20% रकम को बचत और निवेश के लिए
वहीं अगर आपके ऊपर खर्च की जिम्मेदारियां कम हैं, तो अपनी सैलरी का 30% से 40% हिस्सा आप निवेश के लिए अलग रख सकते हैं.
इन गलतियों से बचें
- निवेश की शुरूआत करने में देरी बिल्कुल न करें.
- कभी भी अपनी पूरी सैलरी खर्च न करें.
- इमरजेंसी फंड को नजरअंदाज करने से बचें.
- सिर्फ ज्यादा रिटर्न के लालच में निवेश की शुरूआत न करें.
- दोस्तों के साथ मिलकर या सोशल मीडिया के ट्रेंड देखकर पैसे न लगाएं.
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