Bikaner namkeen export crisis: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले और इससे मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब मशहूर नमकीन एवं स्नैक्स ब्रांड बीकानेर (Bikaner) पर भी पड़ने लगा है. जंग के जारी रहने रहने से नमकीन एक्सपोर्ट की रफ्तार धीमी पड़ती जा रही है. राजस्थान के बीकानेर इलाके के एक्सपोटर्स को खाड़ी देशों और यूरोपीय बाजारों में भुजिया, पापड़ और मसालों की खेप भेजने में काफी रुकावटें आ रही हैं. 

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एक्सपोर्टर्स के सामने नई चुनौती

बीकानेर अपने नमकीन इंडस्ट्री के लिए बहुत मशहूर है. यहां से नमकीन और पापड़ ईरान, इराक, कतर, बहरीन, ओमान, यूएई जैसे खाड़ी देशों और ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन जैसे यूरोपीय देशों में भेजे जाते हैं. अब ईरान में जंग के बीच एक्सपोर्टर्स का कहना है कि इस टकराव की वजह से कंटेनरों की भारी कमी हो गई है.

पहले 15-20 कंटेनरों में भरकर सामान भेजे जाते थे, लेकिन अब इनकी कमी होने से करोड़ों रुपयों का माल बंदरगाहों पर या ट्रांजिट में फंसा हुआ है. ऊपर से एक्सपोर्ट का अभी पीक सीजन है, ऐसे में सामान भेजने में हो रही देरी और बढ़ती लागत से बीकानेर के एक्सपोर्ट-बेस्ड इंडस्ट्री पर संकट गहराता जा रहा है. 

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डिलीवरी में अधिक समय

कंटेनरों की कमी के साथ-साथ सुरक्षित समुद्री रास्ते की तलाश में जहाजों को लंबे रूट लेने पड़ रहे हैं. इसके चलते पहले जो शिपमेंट 30 दिनों में पहुंच जाता था, उसे पहुंचने में अब 60 दिन का समय लग रहा है. यानी कि डिलीवरी में अब दोगुना समय लग रहा है. इस बीच, समुद्री रास्ते में जोखिम बढ़ने के कारण फ्रेंट चार्जेस में भी कई गुना इजाफा हुआ है, बीमा कंपनियां भी अब जहाजों के लिए ज्यादा 'रिस्क प्रीमियम' वसूल रही हैं. 

क्या महंगे हो जाएंगे बीकानेरी नमकीन?

जंग के कारण कच्चे माल की भी कीमतें बढ़ी हैं. पिछले एक महीने में खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले तेल (Edible oil) की कीमतें 20 परसेंट तक बढ़ी हैं. पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के बीच पैकेजिंग पर आ रहा खर्च भी 30-40 परसेंट तक बढ़ा है. इन सबके बीच मैन्युफैक्चररर्स को डर है कि जंग के कारण पैदा हुई इस अस्थिरता के बीच प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका असर आम आदमी की जेबों पर पड़ेगा. यानी कि आने वाले समय में बीकानेरी नमकीन और भुजिया के चटकारे लेना महंगा साबित हो सकता है. 

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