Mutual Fund Investment December Data: इक्विटी म्यूचुअल फंड में दिसंबर महीने में निवेश मासिक आधार पर छह प्रतिशत घटकर 28,054 करोड़ रुपये रहा. उद्योग निकाय एम्फी ने इस संबंध में शुक्रवार को आंकड़े जारी किए है. इक्विटी निवेश में कमी के साथ-साथ म्यूचुअल फंड उद्योग की कुल संपत्ति में मामूली गिरावट आई.

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इससे प्रबंधन अधीन परिसंपत्ति (एयूएम) नवंबर के 80.80 लाख करोड़ रुपये से घटकर दिसंबर में 80.23 लाख करोड़ रुपये रह गई. यह ऋण योजनाओं से भारी निकासी के प्रभाव को दर्शाता है. 

एम्फी के सीईओ का बयान

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एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड ऑफ इंडिया (एम्फी) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) वेंकट एन. चालसानी ने कहा, उद्योग के एयूएम में आई कमी मुख्य रूप से नगदी प्रबंधन के लिए बॉन्ड यानी निश्चित आय वाले कोष से निकासी और सीमित बाजार-संबंधित मूल्य परिवर्तनों के कारण हुई.

एम्फी के आंकड़ों के अनुसार, म्यूचुअल फंड उद्योग ने दिसंबर में 66,591 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की जानकारी दी. इसका मुख्य कारण निश्चित आय वाली योजनाओं से भारी मात्रा में निकासी थी, जबकि इक्विटी एवं गोल्ड फंड निवेशकों को आकर्षित करते रहे.

इक्विटी निवेश में हालांकि नवंबर के 29,911 करोड़ रुपये की तुलना में नरमी आई. फिर भी यह अक्टूबर के 24,690 करोड़ रुपये से अधिक रहा. सितंबर में इक्विटी में शुद्ध निवेश 30,421 करोड़ रुपये और अगस्त में 33,430 करोड़ रुपये था. बाजार में बीच-बीच में आने वाली अस्थिरता के बावजूद, इक्विटी में प्रवाह स्थिर बना रहा.

एसआईपी के निवेशकों की संख्या में हुई बढ़ोतरी 

इसे व्यवस्थित निवेश योजनाएं (एसआईपी) के स्थिर योगदान का समर्थन मिला. एसआईपी के माध्यम से खुदरा निवेशकों की भागीदारी नवंबर में 29,445 करोड़ रुपये से बढ़कर दिसंबर में रिकॉर्ड 31,000 करोड़ रुपये के उच्च स्तर पर पहुंच गई. यह अनुशासित और दीर्घकालिक धन सृजन रणनीतियों के प्रति उनकी प्राथमिकता को दर्शाता है. 

आनंद राठी वेल्थ के संयुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) फिरोज अजीज ने कहा, आंकड़ों से पता चलता है कि निवेशकों ने बाजार में आई गिरावट को लगातार अधिक निवेश करने के अवसर के रूप में इस्तेमाल किया है. वित्त वर्ष 2024-25 में कुल एसआईपी योगदान 3.34 लाख करोड़ रुपये रहा जो अल्पकालिक अटकलों के बजाय दीर्घकालिक इरादे एवं विश्वास को दर्शाता है. 

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