Loan and EMI: ज्यादातर लोग लोन लेते समय सिर्फ और सिर्फ ईएमआई की तरफ ही देखते हैं. अगर ईएमआई बजट में लगती है तो लोग जल्द से जल्द लोन लेने की योजना बनाना शुरू कर देते हैं. ऐसे में यह तरीका आपको किसी परेशानी में भी डाल सकता है. कम ईएमआई का मतलब लंबा कार्यकाल होता है जिसकी वजह से आपको समय के साथ-साथ ज्यादा से ज्यादा ब्जाज का बोझ चुकाना पड़ सकता है. इसलिए जब भी आप लोन लें तो इन नियमों का हमेशा ध्यान रखें. 

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1. अपनी जरूरत के अनुसार ही लें उधार

हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि, आपकी सभी ईएमआई आपकी मासिक आय के सीमित हिस्से के अंदर ही होनी चाहिए. अपनी क्षमता के मुताबिक की उधार लें. 

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2. लंबे कार्यकाल का नुकसान

इसके अलावा कार्यकाल जितना ज्यादा लंबा होगा, ब्याज भी समय के साथ-साथ जुड़ता जाएगा. इसलिए, थोड़ा ज्यादा ईएमआई देकर छोटा कार्यकाल चुनना आपके लिए बेहतरीन विक्लप है. 

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3. ब्याज दर और छिपे हुए खर्च

इतना ही नहीं, सिर्फ विज्ञापनों में दिखाई जाने वाली ब्याज दरों की तुलना करना बंद कर देनी चाहिए. प्रोसेसिंग फीस, प्रीपेमेंट चार्ज और लेट पेमेंट पेनाल्टी जैसे छिपे हुए खर्चों को आपको सही तरह से समझने की जरूरत है. 

4. छोटे प्रीपेमेंट का बड़ा असर

एक बात का हमेशा ध्यान रखें कि लोन को जल्दी खत्म करने के लिए किसी बड़ी रकम का इंतजार न करें. यानी समय-समय पर किए गए छोटे-छोटे भुगतान भी लोन को बेहद ही कम करने में सबसे ज्यादा मदद करता है. ऐसा करने से भविष्य में लगने वाला ब्याज और लोन धीरे-धीरे कम होने लगता है. 

हांलाकि, लोन तभी किफायती होता है जब वह आपके भविष्य पर किसी तरह का दबाव नहीं डालता है. सिर्फ ईएमआई देखने के बजाय कार्यकाल, कुल ब्याज और अपनी वास्तविक चुकाने की क्षमता को ध्यान में रखना अनिवार्य है. 

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