शेयर बाजार में बीमा सेक्टर को लंबे समय से स्थिर और भरोसेमंद निवेश विकल्प माना जाता है. जब किसी बीमा कंपनी के प्रीमियम कलेक्शन या पॉलिसी बिक्री के आंकड़े तेजी से बढ़ते हैं, तो निवेशकों का ध्यान भी उसकी तरफ जाता है. लेकिन सिर्फ प्रीमियम बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि कंपनी अच्छा मुनाफा भी कमा रही है. बीमा कारोबार दूसरे बिजनेस से थोड़ा अलग होता है. यहां कंपनी पहले ग्राहकों से प्रीमियम लेती है और बाद में दावों का भुगतान करती है. ऐसे में किसी बीमा कंपनी की असली ताकत समझने के लिए सिर्फ प्रीमियम नहीं, बल्कि कई दूसरे आंकड़ों को भी देखना जरूरी होता है.
सिर्फ प्रीमियम ग्रोथ देखकर न लें फैसला
बीमा कंपनियां अक्सर अपने प्रीमियम कलेक्शन में बढ़ोतरी को बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करती हैं. जीवन बीमा कंपनियों में नया बिजनेस प्रीमियम और नवीनीकरण प्रीमियम पर नजर रखी जाती है, जबकि सामान्य बीमा कंपनियों में ग्रॉस रिटन प्रीमियम देखा जाता है. हालांकि कई बार कंपनियां ज्यादा ग्राहकों को जोड़ने के लिए कम कीमत पर पॉलिसी बेचती हैं या ज्यादा कमीशन देती हैं. इससे शुरुआती आंकड़े तो अच्छे दिख सकते हैं, लेकिन भविष्य में दावों का बोझ बढ़ने पर मुनाफा प्रभावित हो सकता है.
एम्बेडेड वैल्यू बताती है असली ताकत
जीवन बीमा कंपनियों का मूल्यांकन करते समय एम्बेडेड वैल्यू एक महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है. यह बताता है कि कंपनी की मौजूदा पॉलिसियों से भविष्य में कितना लाभ मिलने की उम्मीद है. क्योंकि जीवन बीमा की पॉलिसियां कई सालों तक चलती हैं, इसलिए आज बेची गई पॉलिसी आने वाले वर्षों में भी कमाई का जरिया बन सकती है. एम्बेडेड वैल्यू निवेशकों को यह समझने में मदद करती है कि कंपनी के पास भविष्य के लिए कितना मजबूत आधार मौजूद है.
VNB और VNB मार्जिन पर भी रखें नजर
बीमा क्षेत्र में VNB यानी वैल्यू ऑफ न्यू बिजनेस एक अहम संकेतक माना जाता है. यह बताता है कि नई बेची गई पॉलिसियों से कंपनी को भविष्य में कितना फायदा हो सकता है. अगर किसी कंपनी का VNB मार्जिन अच्छा है तो इसका मतलब है कि वह सिर्फ ज्यादा पॉलिसियां नहीं बेच रही, बल्कि लाभदायक पॉलिसियां भी बेच रही है. निवेशकों के लिए यह संकेत काफी महत्वपूर्ण होता है.
ग्राहक कंपनी के साथ टिके हुए हैं या नहीं?
बीमा कारोबार में ग्राहक को बनाए रखना बेहद जरूरी होता है. इसी को परसिस्टेंसी रेशियो यानी स्थायित्व अनुपात से मापा जाता है. यह आंकड़ा बताता है कि पॉलिसी खरीदने के बाद कितने ग्राहक समय पर प्रीमियम जमा करते रहते हैं. अगर यह अनुपात ज्यादा है तो इसका मतलब है कि ग्राहक कंपनी पर भरोसा कर रहे हैं. वहीं कम अनुपात गलत बिक्री या कमजोर ग्राहक सेवा का संकेत हो सकता है.
सामान्य बीमा कंपनियों के लिए संयुक्त अनुपात जरूरी
अगर आप किसी जनरल इंश्योरेंस कंपनी में निवेश करना चाहते हैं तो संयुक्त अनुपात जरूर देखें. यह दावों और खर्चों को जोड़कर बताता है कि कंपनी अंडरराइटिंग से मुनाफा कमा रही है या नहीं. 100 फीसदी से कम संयुक्त अनुपात को अच्छा माना जाता है. इसका मतलब है कि कंपनी प्रीमियम से ज्यादा कमा रही है और खर्च कम कर रही है.
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सॉल्वेंसी रेशियो भी है बेहद अहम
बीमा कारोबार भरोसे पर चलता है. ग्राहक इस उम्मीद में प्रीमियम भरते हैं कि जरूरत पड़ने पर कंपनी उनका दावा चुकाएगी. सॉल्वेंसी रेशियो बताता है कि कंपनी के पास भविष्य की जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए पर्याप्त पूंजी है या नहीं. मजबूत सॉल्वेंसी वाली कंपनियां आमतौर पर ज्यादा सुरक्षित मानी जाती हैं.
उत्पाद और वितरण नेटवर्क भी देखें
सभी बीमा उत्पाद समान रूप से लाभदायक नहीं होते. कुछ पॉलिसियों में मार्जिन ज्यादा होता है, जबकि कुछ में कम. इसके अलावा कंपनी ग्राहकों तक कैसे पहुंच रही है, यह भी महत्वपूर्ण है. मजबूत एजेंट नेटवर्क, बैंक साझेदारी और डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनी की लंबी अवधि की ग्रोथ में मदद करते हैं.
निवेश से पहले यह चेकलिस्ट जरूर अपनाएं
बीमा कंपनियों में निवेश करते समय सिर्फ प्रीमियम ग्रोथ देखकर फैसला न लें. एम्बेडेड वैल्यू, VNB, VNB मार्जिन, परसिस्टेंसी रेशियो, संयुक्त अनुपात, सॉल्वेंसी रेशियो और उत्पाद पोर्टफोलियो जैसे संकेतकों का भी विश्लेषण करें.
