30 लाख की सैलरी पर क्या 9 लाख इनकम टैक्स देना पड़ता है? जानिए नए टैक्स रिजीम में कैसे बचेंगे आपके पैसे
Income Tax on 30 Lakh Salary: सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को नए टैक्स रिजीम में 75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है. अगर किसी की सालाना सैलरी 30 लाख है तो पहले 75000 घटाए जाएंगे.

Income Tax: अक्सर लोगों को लगता है कि अगर किसी की सालाना सैलरी 30 लाख है, तो उसे सीधे 30% यानी करीब 9 लाख इनकम टैक्स देना होगा. लेकिन नए टैक्स रिजीम में ऐसा नहीं होता. टैक्स पूरी सैलरी पर एक साथ 30% की दर से नहीं लगता, बल्कि अलग-अलग आय वर्ग (स्लैब) के हिसाब से लगाया जाता है. यही वजह है कि वास्तविक टैक्स इससे काफी कम बनता है.
चार्टर्ड अकाउंटेंट संतोष मिश्रा के मुताबिक, सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को नए टैक्स रिजीम में 75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है. यानी अगर किसी की सालाना सैलरी 30 लाख है, तो पहले 75,000 घटाए जाएंगे. इसके बाद टैक्स की गणना 29.25 लाख की टैक्सेबल इनकम पर होगी.
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AY 2026-27 (FY 2025-26) के नए टैक्स रिजीम के स्लैब इस प्रकार हैं...
- 4 लाख तक – कोई टैक्स नहीं
- 4 लाख से 8 लाख – 5%
- 8 लाख से 12 लाख – 10%
- 12 लाख से 16 लाख – 15%
- 16 लाख से 20 लाख – 20%
- 20 लाख से 24 लाख – 25%
- 24 लाख से ऊपर – 30%
इसका मतलब यह नहीं है कि 29.25 लाख की पूरी आय पर 30% टैक्स लगेगा. 30% की दर सिर्फ 24 लाख से ऊपर की आय, यानी 5.25 लाख पर लागू होगी. बाकी आय पर संबंधित स्लैब के अनुसार 5% से 25% तक की दर से टैक्स लिया जाएगा.
इस गणना के अनुसार कुल इनकम टैक्स 4,57,500 बनता है. इसमें 4% हेल्थ और एजुकेशन सेस जोड़ने के बाद कुल टैक्स 4,75,800 हो जाता है.
चार्टर्ड अकाउंटेंट अभिनंदन पांडेय के अनुसार, अगर कुल टैक्स को कुल सैलरी से तुलना करें तो प्रभावी (Effective) टैक्स रेट करीब 15.86% बैठता है. यानी 30 लाख की सालाना सैलरी पर 30% नहीं, बल्कि लगभग 15.86% टैक्स देना पड़ता है.
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विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि भारत में टैक्स स्लैब सिस्टम लागू है, जिसमें हर स्लैब की टैक्स दर सिर्फ उसी हिस्से की आय पर लागू होती है. इसके अलावा 75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी टैक्सेबल इनकम को कम कर देता है.














