Complaint Against Wipro: सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र के कर्मचारियों की संस्था एनआईटीईएस ने सोमवार को श्रम मंत्री मनसुख मांडविया को लिखित शिकायत देकर विप्रो लिमिटेड पर 250 से अधिक नव-चयनित कर्मचारियों को कई महीनों बाद भी काम पर नहीं रखने का आरोप लगाया है. एनआईटीईएस के अनुसार, ये उम्मीदवार देश के विभिन्न राज्यों में विप्रो द्वारा संचालित ‘टर्बो’ और ‘नेक्स्टजेन टैलेंट हायरिंग’ कार्यक्रमों के तहत चयनित किए गए थे और उन्हें मई 2025 में पद, वेतन और जॉइनिंग प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी के साथ आशय पत्र जारी किए गए थे.
सेलेक्शन के बाजवूद नहीं बुलाया
कई मामलों में कंपनी ने औपचारिक ऑनबोर्डिंग ईमेल भी भेजे, जिनमें जॉइनिंग डेट, कार्यस्थल और दस्तावेज़ी प्रक्रिया का उल्लेख था, लेकिन सभी शर्तें और पृष्ठभूमि सत्यापन पूरा करने के बावजूद उम्मीदवारों को तय समय पर काम पर नहीं बुलाया गया.
संगठन का कहना है कि उम्मीदवारों को लंबे समय तक अनिश्चितता, सामान्य जवाबों और बदलती व्याख्याओं के बीच छोड़ दिया गया, जबकि कई लोग कैंपस प्लेसमेंट नियमों के कारण अन्य नौकरी के अवसर भी नहीं अपना सके और कुछ ने दूसरी जॉब ऑफर ठुकरा दी.
विप्रो के खिलाफ शिकायत
एनआईटीईएस के मुताबिक, कंपनी की ओर से स्पष्ट जवाब न मिलने के कारण कई उम्मीदवार छह से आठ महीने तक बेरोजगार रहे, जिससे उन पर वित्तीय दबाव और मानसिक तनाव बढ़ा है. संस्था ने केन्द्र सरकार से हस्तक्षेप कर विप्रो से जवाब-तलब करने और सभी प्रभावित उम्मीदवारों को जॉइनिंग की स्पष्ट तारीख या कारण सहित लिखित जानकारी देने की मांग की है.
इसके साथ ही, संगठन ने यह चेतावनी दी कि यदि इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसी प्रथाएं आईटी उद्योग में सामान्य बन सकती हैं, जिससे भारत के युवा कार्यबल को दीर्घकालिक नुकसान होगा.