ECC Fund News: दिल्ली में प्रदूषण को कम करने के मकसद से वसूले गए पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) के इस्तेमाल को लेकर CAG की रिपोर्ट में कई अहम खामियों पर सवाल उठाए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2025 तक इस चार्ज से जमा 843.12 करोड़ रुपये लंबे समय तक खर्च ही नहीं किए गए. सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि चार्ज संग्रह से जुड़ा कई महीनों का रिकॉर्ड भी मौजूद नहीं पाया गया. यही वजह है कि फंड के रिकॉर्ड और निगरानी पर सवाल खड़े हो गए हैं, जिन पर CAG ने चिंता जताई है.

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क्या है ECC?

ECC दिल्ली में प्रवेश करने वाले कमर्शियल वाहनों पर वसूला जाने वाला चार्ज है. जिसका खास मकसद राजधानी में वायु प्रदूषण को कम करना और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाना है. हालांकि यह चार्ज साल  2015 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लागू किया गया था. जिसकी वसूली दिल्ली नगर निगम (MCD) करता है और बाद में यह रकम दिल्ली सरकार के खाते में जमा की जाती है.

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CAG रिपोर्ट में क्या-क्या सामने आया?

  • साल 2015-16 से 2024-25 के बीच ECC के रूप में कुल 1,624.63 करोड़ रुपये जुटाए गए.
  • इनमें से सिर्फ 781.51 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए.
  • जबकि 843.12 करोड़ रुपये 31 मार्च 2025 तक बिना इस्तेमाल के पड़े रहे.
  • ऑडिट के दौरान 280 दिनों के चार्ज संग्रह का डेटा मौजूद नहीं मिला.
  • CAG ने इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.

कौन-सा रिकॉर्ड गायब है?

  • रिपोर्ट के मुताबिक दो अलग-अलग अवधियों का रिकॉर्ड मौजूद नहीं था.
  • 6 अप्रैल 2018 से 26 अप्रैल 2018 तक के 21 दिनों का डेटा.
  • 18 दिसंबर 2020 से 2 सितंबर 2021 तक के 259 दिनों का डेटा.
  • यानी इन दोनों अवधियों को मिलाकर कुल 280 दिनों का रिकॉर्ड गायब मिला.

ECC से होने वाली कमाई में बदलाव

  • 2015-16 में 144.06 करोड़ रुपये
  • 2016-17 में यह बढ़कर 358.11 करोड़ रुपये
  • 2017-18 में सबसे ज्यादा 472.63 करोड़ रुपये 
  • इसके बाद संग्रह में लगातार गिरावट शुरू हुई.
  • 2023-24 में 95.30 करोड़ रुपये
  • 2024-25 में 93.54 करोड़ रुपये 
  • कोविद महामारी के दौरान 2021-22 में सबसे कम 39.40 करोड़ रुपये वसूले गए.

खर्च को लेकर भी उठे सवाल

  • 2015-16 में ECC फंड से कोई नहीं हुआ.
  • 2016-17 में सिर्फ 0.93 करोड़ रुपये खर्च किए गए.
  • 2017-18 में यह खर्च घटकर 0.15 करोड़ रुपये रहा.
  • 2018-19 में 271.43 करोड़ रुपये खर्च किए गए.
  • 2019-20 में यह घटकर 9 करोड़ रुपये के आसपास रह गया.
  • वहीं 2020-21 से 2022-23 तक लगातार कोई खर्च दर्ज नहीं हुआ.
  • 2023-24 में 500 करोड़ रुपये खर्च किए गए.
  • ऑडिट के मुताबिक 10 सालों में से 5 सालों में ECC फंड से कोई खर्च नहीं किया गया.

क्यों अहम है यह मामला?

ECC से जुटाई गई रकम का खास मकसद दिल्ली में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कंट्रोल करना और उस रकम का इस्तेमाल सार्वजनिक परिवहन, सड़क ढांचे और पर्यावरण उपायों को मजबूत करना था.

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