कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर अब आम लोगों की जेब पर सीधे तौर पर पड़ने वाला है. अगर अमेरिका में कच्चे तेल की कीमतें 90 USD पर ही रहीं तो ये भारत में भी महंगाई को बढ़ा सकता है. हाल ही में आई यूनियन बैंक की रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है. इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि यदि ऐसा ही हाल रहा तो आपकी EMI पर इसका सीधा असर पड़ने वाला है. इस खबर से मिडिल क्लास के लोगों को चिंता हो सकती है.

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क्या कहती है रिपोर्ट?यूनियन बैंक की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि, कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतें सीधे तौर पर महंगाई को बढ़ावा दे रही हैं. भारत अपनी के लिए तेल आयात करता है, इसलिए इंटरनेशनल मार्केट में तेजी का असर घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल और अन्य जरूरी चीजों की कीमतों पर पड़ता है. इससे महंगाई दर में भी इजाफा होता है. ऐसी स्थिति में Reserve Bank of India के लिए ब्याज दरों को नियंत्रित रखना इतना आसान हीं होगा. महंगाई को काबू में रखने के लिए आरबीआई रेपो रेट में बढ़ोतरी कर सकता है या दरों में कटौती को टाल सकता है. जिसका सीधा असर लोन लेने वाले लोगों की EMI पर पड़ेगा.

मिडिल क्लास पर पड़ेगा असरहोम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई बढ़ने से मिडिल क्लास परिवारों पर इसका असर पड़ेगा. उनका मासिक बजट डगमगा जाएगा. खासतौर से वो लोग जिनकी एक मुश्त राशि महीने के आखिर में आती है यानी सैलरी पर जीने वाले लोग. उनके लिए खर्चों को मैनेज करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. अगर कच्चा तेल लंबे समय तक 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहता है, तो इसका असर अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिलेगा.

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कुल मिलाकर, कच्चे तेल की कीमतों के कारण अभी से ही महंगाई की मार देखने को मिल रही है. मार्च 2026 में महंगाई में 3.88 प्रतिशत का उछाल आया था. इससे पहले वाले महीने में ये दर 2.13 प्रतिशत थी. तो वहीं पिछले साल इसी महीने में महंगाई 2.25 प्रतिशत उछली थी. इसका मतलब ये है कि कच्चे तेल की कीमतों में आ रहा उछाल केवल ईंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे महंगाई, ब्याज दर और आम आदमी की जेब पर गहरा असर पड़ रहा है.