Crude Oil Price: ईरान पर इजरायल के हमलों के बीच लगातार तीसरे दिन तेल में लगी आग, बढ़ा महंगाई का खतरा
Crude Oil Price Today: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है. जारी संघर्ष और ईरानी सरकार के होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से लगातार तीसरे दिन कच्चे तेल की कीमतें उछल गई.

Brent Crude Price Surge: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है. जारी संघर्ष और ईरानी सरकार के होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के फैसले से मंगलवार के कारोबारी दिन लगातार तीसरे दिन कच्चे तेल की कीमतें उछल गई.
होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से वैश्विक सप्लाई का 20 प्रतिशत हिस्सा बाधित हो जाएगा. जिससे कीमतें आसमान छू सकती है. आइए जानते है, आज कच्चे तेल के दाम कितने बढ़ गए हैं...
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन तेजी
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को ब्रेंट क्रूड वायदा 1.4 प्रतिशत या 1.10 डॉलर की तेजी के साथ 78.83 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े पर पहुंच गया है. इसके आखिरी कारोबारी दिन सोमवार को क्रूड वायदा 82.37 डॉलर तक उछला गया था. जो कि जनवरी 2025 के बाद सबसे ऊंचा लेवल है. हालांकि, इसके बाद कीमतों में कुछ नरमी आई थी.
दिन की समाप्ति पर यह 6.7 फीसदी की मजबूती के साथ बंद हुआ था. कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी पिछले 3 दिनों से जारी है. ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतों को लगातार सपोर्ट मिल रहा है. बाजार जानकारों के अनुसार, यह संघर्ष जितना लंबा चलेगा, उतनी ही कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंका बनी रहेगी.
आपूर्ति बाधित हुई तो आसमान छू सकता है कच्चा तेल
मौजूदा तनावपूर्ण हालात को देखते हुए विशेषज्ञों का अनुमान है कि ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 से 115 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है. यदि प्रमुख समुद्री रास्तों पर रुकावट होती है तो दाम 120 से 140 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच सकते हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि, कीमत में यह तेजी इस बात पर निर्भर करने वाली है कि पश्चिम एशिया में अनिश्चितता का माहौल कितने समय तक बना रह सकता है. तेल उत्पादक देशों के समूह के प्रमुख सदस्य सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के पास लगभग 4 से 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन अतिरिक्त उत्पादन क्षमता मौजूद है. लेकिन इस अतिरिक्त आपूर्ति का बड़ा हिस्सा अभी भी होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भर करता है. जिसके कारण पैदा हुई आशंका को नकारा नहीं जा सकता.
बढ़ सकती है महंगाई
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने का सीधा असर देश के आयात बिल पर पड़ता है. तेल महंगा होने से पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की लागत बढ़ सकती है.
जिससे रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती है. जिसका सीधा प्रभाव आम लोगों की जेब पर पड़ेगा और लोगों को महंगाई का सामना करना पड़ सकता है.
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