उधर अमेरिका ने दागी मिसाइल, इधर कच्चे तेल में लगी आग; मिडिल ईस्ट में टेंशन से 6% उछला क्रूड ऑयल
Crude Oil: आज अंतर्राष्ट्रीय कमोडिटी मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतों में 6% का भारी उछाल आया है, जिससे वैश्विक बाजारों में फिर से खलबली मच गई है. ईरान पर अमेरिकी हवाई हमले के बाद ऐसा हुआ.

- अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में 3% का उछाल आया.
- अमेरिका ने होर्मुज में ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया.
- ईरान को तेल बेचने वाला अमेरिकी लाइसेंस भी रद्द हुआ.
- भारत में ईंधन कीमतें बढ़ने की आशंका बढ़ गई है.
Crude Oil Price Hike: बीते कुछ दिनों से अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ रही थी, लेकिन यह सिलसिला ज्यादा दिन तक नहीं चला. आज यानी कि 8 जुलाई को कच्चे तेल की कीमतों में 6% का भारी उछाल आया है. ब्रेंट क्रूड करीब 5.6% बढ़कर 78 डॉलर प्रति बैरल हो गया है. WTI Crude भी लगभग 5.8% की तेजी के साथ 74.55 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है.
क्यों कच्चे तेल में आई तेजी?
अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में मंगलवार को ईरान के 80 से अधिक ठिकानों पर दनादन हमले किए. इस दौरान अमेरिका ने ईरान के एयर डिफेंस, तटीय रडार नेटवर्क, एंटी-शिप क्रूज मिसाइल लॉन्च पैड पूरी तरह से तबाह कर दिए. अमेरिका ने ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की 60 से अधिक नावें भी नष्ट कर दी.
अमेरिका ने यह सैन्य कार्रवाई बीते दिनों होर्मुज से होकर गुजर रहे तीन कमर्शियल ऑयल टैंकरों- जिनमें कतर के झंडे वाला 'अल रेकय्यात' भी शामिल था - पर ड्रोन और मिसाइलों से हुए हमले के बाद किया. ईरान ने भले ही इन हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसी इसके लिए ईरान को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. अब अमेरिका के हमले के बाद ईरान ने भी कड़ा जवाब देने की धमकी दे दी है, जिससे मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर से चरम पर पहुंच गया है. ईरान के पड़ोसी देश कुवैत और बहरीन में एयर डिफेंस सिस्टम हाई अलर्ट पर हैं.
अमेरिका ने लिया एक और बड़ा फैसला
हमले के तुरंत बाद अमेरिका ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए ईरान को तेल बेचने के लिए दिए गए स्पेशल लाइसेंस (Sanctions Waiver) को भी रद्द कर दिया है. जून में अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौता हुआ था, जिसके तहत अमेरिका ने ईरान को 60 दिनों (21 अगस्त 2026 तक) के लिए दुनिया भर में अपना तेल कानूनी तौर पर बेचने की अनुमति दी थी. हालांकि, अब अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अपने नए आदेश में कहा है कि पिछले महीने दी गई इस छूट को पूरी तरह से खत्म किया जा रहा है.
भारत पर असर
भारत को उम्मीद थी कि ईरान के तेल के मार्केट में आने से कच्चे तेल के दाम कम होंगे, जिससे देश में पेट्रोल-डीजल के दाम कम होंगे, लेकिन अब ईरान को दिए गए लाइसेंस के रद्द होने से यह उम्मीद खत्म हो गई है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर अगले 48 घंटों के भीतर माहौल शांत नहीं हुआ, तो क्रूड ऑयल की कीमतें 80-85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है. भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है. ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने से आयात महंगा होगा, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खर्च होगा और आने वाले समय में इससे पेट्रोल-डीजल के दाम भी बढ़ सकते हैं.
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