कच्चे तेल की कीमतों ने एक बार फिर दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है. मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और तेल की सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता के बीच क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं. बुधवार यानी 16 सितंबर को ब्रेंट क्रूड करीब 107 से 109 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था. हालांकि, अमेरिकी क्रूड इन्वेंट्री बढ़ने से कीमतों में थोड़ी नरम भी आई है. 

Continues below advertisement

लेकिन बाजार की चिंता अभी खत्म नहीं हुई है. अगर मिडिल ईस्ट में सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें लंबी चलती हैं तो क्रूड के 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है. ऐसे में भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए मुश्किल बढ़ सकती है.

क्यों बढ़ रहा है क्रूड का भाव?

Continues below advertisement

इस समय कच्चे तेल के बाजार में सबसे बड़ी चिंता सप्लाई को लेकर है. सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमले के बाद इस रास्ते से तेल की आवाजाही प्रभावित हुई है. इसके अलावा यानबू पोर्ट से तेल की लोडिंग भी रोकनी पड़ी है. ये पाइपलाइन सऊदी अरब के तेल को रेड सी तक पहुंचाने वाला अहम रास्ता है. इसका इस्तेमाल होने से सऊदी तेल को होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरने की जरूरत कम पड़ती है.

अब इस रूट में परेशानी आने से बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है. यही वजह है कि बाजार में यह डर बना हुआ है कि अगर सप्लाई बाधित रही तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमत और ऊपर जा सकती है.

UPI पर चार्ज, आम जनता के लिए ये 5 चीजें रहेंगी बिल्कुल फ्री

भारत क्यों परेशान है?भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने का सीधा असर देश के तेल आयात बिल पर पड़ता है. इसे आसान भाषा में समझें तो विदेश से भारत को एक बैरल तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ेंगे.

इससे देश का इम्पोर्ट बिल बढ़ेगा. इसके अलावा अगर महंगा तेल लंबे समय तक बना रहता है तो सरकार और तेल कंपनियों पर भी दबाव बढ़ सकता है. हाल ही में भारत के क्रूड बास्केट की कीमत भी तेजी से बढ़ी है. भारतीय क्रूड बास्केट 2 सितंबर के करीब 99.35 डॉलर से बढ़कर 14 सितंबर को 128.7 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था. 

क्या पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत बढ़ जाएंगे?कच्चा तेल 120 डॉलर पर पहुंचते ही अगले दिन पेट्रोल और डीजल के दाम उतने ही बढ़ जाएं, ऐसे नहीं होता है. भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत कई सारे फैक्टर्स को देखकर तय किए जाते हैं. क्रूड ऑयल की कीमत के अलावा डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट, रिफाइनिंग कॉस्ट, टैक्स और तेल कंपनियों के मार्जिन भी देखें जाते हैं.

इसके अलावा तेल कंपनियां हमेशा अंतरराष्ट्रीय बाजार में रोज होने वाले बदलाव को उसी दिन पेट्रोल-डीजल के दाम में नहीं डालतीं. अगर क्रूड लगातार ऊंचे स्तर पर बना रहता है तो कीमतों पर दबाव ज्यादा बढ़ सकता है.

किस- किस चीज पर असर पड़ेगा?

अगर क्रूड ऑयल लंबे समय तक 120 डॉलर के आसपास रहता है तो इसका असर सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहेगा. डीजल महंगा होने पर ट्रक, बस और दूसरे मालवाहक वाहनों की लागत बढ़ सकती है. इसका असर सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के खर्च पर पड़ता है.

इसके बाद कंपनियां अपनी लागत का कुछ हिस्सा उत्पादों की कीमत में डाल सकती हैं. यानी महंगा कच्चा तेल धीरे-धीरे ट्रांसपोर्ट से लेकर रोज के सामान तक महंगाई का दबाव बढ़ा सकता है. इसके अलावा एयरलाइंस का फ्यूल कॉस्ट बढ़ जाता है और महंगा तेल मिलने से हवाई यात्रा की टिकट भी महंगी हो सकती है.