उत्तराखंड के जोशीमठ में हुए हेलिकॉप्टर हादसे के बाद चारधाम यात्रा के दौरान हवाई सफर को सुरक्षित बनाने के लिए नए नियम लागू किए गए हैं. अब चारधाम रूट पर उड़ान भरने वाले हर हेलिकॉप्टरों में दो पायलट यानी एक मुख्य पायलट और एक को-पायलट होना जरूरी होगा. इसके अलावा, पायलटों को अब हर उड़ान से पहले उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी (UCADA) से अलग-अलग इजाजत लेनी होगी. 

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दरअसल, हेलिकॉप्टर को पहले एक ही परमिट में आने-जाने के पूरे रूट की मंजूरी मिल जाती थी, लेकिन अब यह व्यवस्था बदल दी गई है. नए नियमों के तहत हर उड़ान के लिए अलग से अनुमति लेनी होगी.

अब हर रूट के लिए अलग परमिट जरूरी

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UCADA के CEO प्रतीक जैन ने PTI को बताया कि डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के निर्देश के बाद यह बदलाव किया गया है. अब एक जगह से दूसरी जगह जाने वाली हर उड़ान के लिए अलग से इजाजत लेनी होगी. उदाहरण के तौर पर, अगर किसी हेलिकॉप्टर को सहस्त्रधारा से बद्रीनाथ जाने की मंजूरी मिली है और वहां से उसे केदारनाथ जाना है, तो इसके लिए उसे दोबारा UCADA से परमिट लेना होगा.

जोशीमठ में कैसे हुआ था हादसा?

दरअसल, यह हादसा शुक्रवार को चमोली जिले के जोशीमठ में चाई गांव के पास हुआ था. एक निजी कंपनी का हेलिकॉप्टर बद्रीनाथ मंदिर से देहरादून लौट रहा था, तभी पहाड़ी इलाके में प्लेन क्रैश हो गया. इस हादसे में हेलिकॉप्टर में सवार सभी छह लोगों की मौत हो गई. अधिकारियों के मुताबिक, हादसे से करीब 15 मिनट पहले भी तीन हेलिकॉप्टरों ने उड़ान भरी थी. 

खराब मौसम की भूमिका की भी जांच

UCADA के आधिकारियों के मुताबिक, पायलट फ्लाइट के दौरान रेडियो के जरिए एक-दूसरे से मौसम की जानकारी शेयर करते हैं. अगर किसी इलाके में बारिश या खराब मौसम होता है, तो दूसरे पायलटों को इसके बारे में अलर्ट किया जाता है. बद्रीनाथ में मौसम पर नजर रखने के लिए एक स्टेशन बनाया गया है, लेकिन जोशीमठ के पास घाटी में ऐसी व्यवस्था नहीं है. इसलिए जांच की जा रही है कि हादसे के समय मौसम कैसा था और क्या किसी दूसरे पायलट ने खराब मौसम की जानकारी शेयर की थी.

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