बाजार में चीनी की उपलब्धता पर्याप्त बनाए रखने और जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. इसके तहत, केंद्र सरकार ने सितंबर 2026 के पहले पखवाड़े (यानी 1 से 15 सितंबर) के लिए 13 लाख टन चीनी का कोटा तय किया है. सरकार के इस नए आदेश के तहत, मिलों को रिलीज ऑर्डर मिलने के सात दिनों के अंदर अपना कोटा बेचना होगा, जबकि पहले इसके लिए एक महीने का वक्त मिलता था.
क्या है नया कोटा सिस्टम?
सरकार के इस नए नियम के तहत, चीनी मिलों को अब एक महीने के बजाय रिलीज ऑर्डर जारी होने के 7 दिनों के भीतर अपना आवंटित कोटा बाजार में हर हाल में बेचना ही होगा. बता दें कि रिलीज ऑर्डर सरकार की तरफ से चीनी मिलों के लिए जारी किया जान वाला एक आधिकारिक आदेश या अनुमति पत्र होता है.
इसके तहत सरकार यह तय करती है कि कोई भी चीनी मिल एक निश्चित समय सीमा के भीतर खुले बाजार में कितनी चीनी बेच सकती है. सरकार के इस मैकेनिज्म के तहत कोई भी चीनी मिल गोदाम में रखी पूरी चीनी एक बार में बाजार में नहीं बेच सकती है क्योंकि अगर एक बार में चीनी की बहुत ज्यादा सप्लाई हो गई, तो दाम तेजी से गिर जाएंगे. इससे मिलों को नुकसान होगा. इसी तरह से अगर मिलें चीनी दबाकर रख लेंगे, तो इसकी किल्लत हो जाएगी और दाम आसमान छूने लगेंगे, जिससे जनता को नुकसान होगा. रिलीज ऑर्डर दोनों के बीच बैलेंस बनाकर चलता है.
जमाखोरी पर रोक
चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच मिलें ज्यादा मुनाफे के लालच में कहीं चीनी का स्टॉक दबाकर नहीं रख पाएं इसलिए सरकार अब 7 दिनों के भीतर कोटा बेचने का कड़ा नियम लेकर आई है, जो 1 से 15 सितंबर के बीच 13 लाख टन है. इतना कोटा गणेश चतुर्थी और ओणम जैसे त्योहारों के दौरान बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है.
सरकार के तय कोटे के हिसाब से 1 से 15 सितंबर के बीच 13 लाख टन चीनी बाजार में आएगी, जिसे मिलों के लिए 7 दिनों के भीतर बेचना अनिवार्य होगा. इससे बाजार में चीनी की कोई कमी नहीं रहेगी, तो कीमतें भी काबू में रहेंगी.
सरकार ने हाल ही में थोक खरीदारों (जैसे मिठाई और कोल्ड ड्रिंक निर्माता) पर भी 15 दिनों से अधिक का स्टॉक रखने पर पाबंदी लगा दी है, जो नवंबर के अंत तक लागू रहेगी
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