Share Market Today: भारतीय शेयर बाजार में हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को ही बड़ी गिरावट आ गई. ग्लोबल ट्रेड टेंशन बढ़ने की आशंका और बड़ी कंपनियों के मिले-जुले नतीजों की वजह से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में रहे. बेंचमार्क BSE सेंसेक्स 600 अंक से ज्यादा गिरकर दिन के निचले स्तर 82953 पर आ गया, जबकि NSE निफ्टी 50 भी 150 अंक से ज्यादा फिसलकर 25550 के लेवल से भी नीचे चला गया. इस दौरान शेयर बाजार के निवेशक सतर्क नजर आए. 

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क्यों थर्रा रहा शेयर बाजार? 

ट्रेड वॉर का सता रहा खौफ 

ग्लोबल मार्केट इन दिनों एक मुश्किल दौर से गुजर रहा है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए-नए फरमान और विघटनकारी नीतियों ने निवेशकों को परेशान कर रखा है. हाल के दिनों में ग्रीनलैंड पर कब्जा जमाने की कोशिशों को अमेरिका ने इन दिनों और तेज कर दिया है. इस क्रम में इसके विरोध में खड़े 8 यूरोपीय देशों के खिलाफ 10 परसेंट टैरिफ लगाने का फैसला लिया है. इनमें डेनमार्क, नॉर्वे, फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड और फिनलैंड शामिल हैं. जाहिर है कि ट्रंप के इस आदेश के बाद ये देश भी चुप नहीं बैठने वाले हैं. निवेशकों को फिलहाल इनके पलटवार का इंतजार है. 

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा कि ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. उन्होंने कहा, ''आगे आने वाले दिन उतार-चढ़ाव भरे होंगे, जिसमें बड़े जियोपॉलिटिकल और जियोइकोनॉमिक डेवलपमेंट का मार्केट पर असर रहेगा. हमें नहीं पता कि प्रेसिडेंट ट्रंप की परेशान करने वाली पॉलिसियों का इंटरनेशनल ट्रेड पर क्या असर होगा. अगर अमेरिका 1 फरवरी से आठ यूरोपीय देशों पर 10 परसेंट टैरिफ लगाता है और जून में इसे बढ़ाकर 25 परसेंट कर देता है, तो जवाबी कार्रवाई लगभग तय है.'' उन्होंने आगे कहा कि ऐसा होने पर एक बड़ा ट्रेड वॉर शुरू हो सकता है, जो ग्लोबल मार्केट के लिए नेगेटिव होगा. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप कभी-कभी पीछे हट जाते हैं और अपना रुख नरम कर सकते हैं. 

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कमजोर तिमाही के नतीजे

शेयर बाजार की इस नाजुक स्थिति की एक और वजह है- बड़ी-बड़ी कंपनियों का तिमाही नतीजे का उम्मीदों पर खरा नहीं उतरना. रिलायंस इंडस्ट्रीज और ICICI बैंक जैसी बड़ी कंपनियों की कमजोर कमाई के कारण बेंचमार्क नीचे आ गए. यह दबाव फाइनेंशियल और घरेलू साइक्लिकल शेयरों पर भी पड़ा, जिससे शुरुआती गिरावट आई.

शेयर बाजार पर बिकवाली का दबाव

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय इक्विटी से पैसा निकालना जारी रखे हुए हैं, जिससे बाजार पर दबाव बना हुआ है. कमजोर रुपया और ग्लोबल रिस्क-ऑफ माहौल बिकवाली को और बढ़ा रहे हैं. इस साल जनवरी में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने 22530 करोड़ रुपये (2.5 बिलियन डॉलर) से अधिक के भारतीय शेयर बेचे हैं.

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि बाजार की सतर्क शुरुआत घरेलू कंसोलिडेशन, बजट से पहले की पोजीशनिंग और मिले-जुले ग्लोबल संकेतों से तय हुई है. उन्होंने कहा कि FPI की कमजोरी और कमजोर रुपया कुल मिलाकर सेंटिमेंट को सतर्क बनाए हुए हैं. 

 

 

 

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