Amazon Refund: आज के समय में लोग दुकानों से समान लेने के बजाय ऑनलाइन शॉपिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि कम समय की बचत हो. ऐसे में आंध्र प्रदेश के जिला उपभोक्ता आयोग ने ऑनलाइन खरीदारी करने वाले ग्राहकों के अधिकार को लेकर एक अहम फैसला किया है. उन्होंने कहा कि अगर किसी प्रोडक्ट का रिफंड निर्माता की ओर से ई-कॉमर्स कंपनी को मिल चुका है, तो वह रकम ग्राहक तक पहुंचाना कंपनी की जिम्मेदारी है. साथ ही इसे अपने पास रखना गलत माना जाएगा.

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इसी मामले में आयोग ने खराब ईयरबड्स  के रिफंड में देरी और शिकायत का सही हल न करने पर अमेजन रिटेल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (Amazon Retail India Pvt. Ltd.) को ग्राहक के 5,199 रुपये वापस करने के साथ 10,000 रुपये तक का मुआवजा देने और मुकदमे का खर्च देने का आदेश सिया है. 

कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?

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विजयनगरम का रहने वाला विवेकानंद ने 18 जनवरी 2024 को अमेजन से 5,199 रुपये में ईयरबड्स खरीदा, लेकिन कुछ समय बाद ही उसके ईयरबड्स में ब्लूटूथ कनेक्टिविटी की परेशानी आने लगी. शिकायत करने पर निर्माता ने पहले वारंटी के जरिए नया ईयरबड्स देने की बात कही लेकिन बाद में 16 दिसंबर, 2025 को नया ईयरबड भेजने के बजाय पूरी रकम रिफंड करने का फैसला किया.  

इसके बाद निर्माता ने रिफंड की रकम तुरंत अमेजन को भेज दी ताकि वह उस ग्राहक के खाते में पैसे ट्रांसफर कर सके. कई बार आश्वासन देने के बावजूद ग्राहक को कोई पैसे वापस नहीं मिले. 

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आयोग ने अमेजन की गलती मानी

ग्राहक के कई बार ईमेल, कॉल और कानूनी नोटिस भेजेने के बाद भी इस समस्या का कोई हाल नहीं हुआ. इतना ही नहीं, बल्कि अमेजन ने बाद में बिना कोई वजह बताए रिफंड की रकम भी कम कर दी, जबकि वह रकम भी उस ग्राहक के खाते में नहीं आई.

इस मामले की जांच के दौरान दस्तावेजों में आयोग ने पाया कि रिफंड की राशि पहले ही अमेजन को मिल चुकी है, लेकिन उन्होंने ग्राहक तक नहीं पहुंचाया. यही वजह है कि आयोग ने अमेजन को 45 दिन के अंदर 5,199 रुपये लौटाने, 5,000 रुपये का मुआवजा देने और व खर्च के लिए 5,000 रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया.

ऑनलाइन खरीदारों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

  • रिफंड में बेवजह देरी करना गलत कारोबारी तरीका माना जाएगा.
  • अगर कोई ग्राहक को बार-बार रिफंड के लिए चक्कर लगाते हैं, तो वह बिना झिझक मुआवजे की मांग कर सकता है.
  • ऐसे में ग्राहक को सिर्फ रिफंड ही नहीं, बल्कि मानसिक परेशानी और कानूनी खर्च  के लिए भी पैसे मिलेंगे.

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