आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल अब केवल काम आसान बनाने तक सीमित नहीं है. साइबर अपराधी भी इस तकनीक का सहारा लेकर बड़े पैमाने पर ऑनलाइन हमलों को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं.

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हाल ही में सामने आई एक साइबर सुरक्षा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अपराधियों ने AI एजेंट्स की मदद से लैटिन अमेरिका के 400 से अधिक बैंकों और वित्तीय संस्थानों को निशाना बनाया. इस मामले ने बैंकिंग सेक्टर की डिजिटल सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं.

कई AI मॉडल का किया गया इस्तेमाल

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रिपोर्ट के अनुसार, इस सिस्टम में अलग-अलग AI मॉडल को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं. इनमें एंथ्रोपिक के क्लोड और SpaceX की xAI से जुड़े ग्रोक जैसे मॉडल शामिल थे. इसके अलावा चीनी कंपनी मूनशूट AI के Kimi मॉडल का भी इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है.

इन मॉडलों के जरिए साइबर अपराधियों ने हमले की योजना बनाने, लक्ष्य से संबंधित जानकारी का विश्लेषण करने और आगे की गतिविधियों में तालमेल बैठाने की कोशिश की. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि AI की सुरक्षा सीमाओं को दरकिनार करने के प्रयास किए गए, ताकि मॉडल से ऐसे काम कराए जा सकें जिनके लिए सामान्य परिस्थितियों में उन्हें मना करना चाहिए.

क्या है पूरा मामला?

साइबर सुरक्षा कंपनी स्रेटकर की रिपोर्ट के मुताबिक, साइबर कार्टल नाम के एक साइबर अपराधी समूह ने CARLIY0S नामक सिस्टम का इस्तेमाल किया. इस सिस्टम को इस तरह तैयार किया गया था कि अलग-अलग AI मॉडल मिलकर साइबर हमले की विभिन्न प्रक्रियाओं को पूरा करने में मदद कर सकें.

इसमें संभावित लक्ष्यों के बारे में जानकारी जुटाना, उनकी डिजिटल सुरक्षा में कमजोरियां तलाशना और हमले की रणनीति बनाने जैसे काम शामिल थे. AI एजेंट्स के इस्तेमाल से अपराधियों के लिए कम मानवीय हस्तक्षेप के साथ कई संस्थानों को निशाना बनाना आसान हो सकता है.

AI कंपनियों और बैंकों के लिए बढ़ी चुनौती

इस मामले के सामने आने के बाद AI तकनीक के दुरुपयोग को रोकने और साइबर सुरक्षा मजबूत करने की जरूरत फिर चर्चा में है. रिपोर्ट के मुताबिक, स्रेटकर ने अपने निष्कर्ष संबंधित AI कंपनियों के साथ साझा किए. एंथ्रोपिक ने जांच के बाद अपराधियों द्वारा क्लोड के इस्तेमाल को रोकने की कार्रवाई की.

विशेषज्ञों के लिए अब बड़ी चुनौती यह है कि बैंक और वित्तीय संस्थान तेजी से बदलते साइबर खतरों का मुकाबला कैसे करें. AI की मदद से हमलों का दायरा और रफ्तार बढ़ सकती है, इसलिए कंपनियों को संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी, सुरक्षा परीक्षण और समय रहते जवाब देने की व्यवस्था मजबूत करनी होगी.

यह मामला बताता है कि AI जहां कारोबार और तकनीक के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है, वहीं इसका गलत इस्तेमाल डिजिटल वित्तीय व्यवस्था के सामने गंभीर जोखिम भी खड़ा कर सकता है.

पासवर्ड और बैंकिंग डेटा पर खतरा

जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, अपराधियों के सिस्टम में संवेदनशील वित्तीय जानकारियों और लॉगिन क्रेडेंशियल्स से जुड़े रिकॉर्ड मौजूद थे. इनमें पासवर्ड, अकाउंट संबंधी जानकारी और API keys जैसे डिजिटल एक्सेस डेटा शामिल थे.

ऐसी जानकारी का गलत इस्तेमाल होने पर वित्तीय संस्थानों के सिस्टम, ग्राहकों की निजी जानकारी और डिजिटल भुगतान सेवाओं की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है. हालांकि, 400 से अधिक संस्थानों को निशाना बनाए जाने का मतलब यह नहीं है कि सभी संस्थानों के खातों में सेंध लगने की पुष्टि हो गई है.

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