केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजरें अब 8वें वेतन आयोग पर टिकी हुई हैं. आयोग के गठन को एक साल हो चुका है और अब इसकी 18 महीने की समयसीमा का करीब 66% हिस्सा पूरा हो गया है. ऐसे में अब कर्मचारियों की नजर इस बात पर है कि नए वेतन ढांचे में कितना बदलाव होगा और फिटमेंट फैक्टर क्या तय किया जाएगा. आयोग की सिफारिशों का असर देश के 1 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों और पेंशनर्स पर पड़ने की उम्मीद है.

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इसमें करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और लगभग 65 लाख पेंशनर्स शामिल हैं. सबसे खास बात यह है कि रेलवे और रक्षा विभाग के मौजूदा कर्मचारियों के साथ रिटायर हो चुके लोगों को भी इससे फायदा मिल सकता है.

कौन कर रहा है 8वें वेतन आयोग की अगुवाई?

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8वें केंद्रीय वेतन आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं. पंकज जैन आयोग के मेंबर-सेक्रेटरी हैं, जबकि प्रोफेसर पुलक घोष इसके सदस्य हैं. आयोग को गठन के 18 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपनी हैं.

कर्मचारियों की सैलरी में क्या बदलाव हो सकते हैं?

आयोग के सामने कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और दूसरी सुविधाओं की समीक्षा करने की जिम्मेदारी है. इसमें फिटमेंट फैक्टर और नया पे मैट्रिक्स जैसे अहम मुद्दे होंगे. इसके अलावा महंगाई भत्ता (DA), पेंशनर्स की महंगाई राहत (DR), मकान किराया भत्ता (HRA), प्रमोशन और सालाना इंक्रीमेंट से जुड़े मामलों पर भी सुझाव दिए जा सकते हैं. हालांकि, आयोग यह भी देखेगा कि मौजूदा समय में कर्मचारियों की जरूरतों के हिसाब से वेतन और सुविधाओं में किस तरह के बदलाव किए जा सकते हैं.

अब तक कितना काम हुआ है?

दरअसल, आयोग की आधिकारिक बैठकें मार्च 2026 में शुरू हुई थीं. वहीं, कर्मचारियों, यूनियनों, मंत्रालयों और पेंशनर्स से सुझाव और जरूरी जानकारी लेने की प्रक्रिया जुलाई में पूरी हुई. अब इन सुझावों और आंकड़ों का अध्ययन वेतन, भत्तों और पेंशन से जुड़ी सिफारिशें तैयार की जाएंगी.

कब तक आ सकती हैं सिफारिशें?

आयोग के पास अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए गठन की तारीख से 18 महीने का समय है. इस हिसाब से उसे मई 2027 तक अपनी सिफारिशें सौंपेनी होंगी. हालांकि, रिपोर्ट आने के बाद भी कर्मचारियों को बढ़ी हुई सैलरी मिलने में समय लग सकता है. सरकार पहले आयोग की सिफारिशों की समीक्षा करेगी और फिर उन्हें लागू करने पर फैसला लेगी.

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