8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार कर्मचारियों के साथ ही पेंशनभोगियों को भी बड़ी ही बेसब्री के साथ है. इसी बीच पुराने पेंशनर्स को इस बात की भी चिंता है कि उनकी पेंशन बढ़ेगी भी या नहीं. इसी के चलते पेंशनभोगी संगठन REWA (रिटायर्ड एम्प्लॉयीज वेलफेयर एसोसिएशन) ने पीएम मोदी से इसे लेकर गुहार लगाई है. संगठन ने पीएम मोदी के नाम पत्र लिखकर अपनी मांगे सामने रखी है.

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ये गुहार उन पेंशनभोगियों ने लगाई है जो 1 जनवरी 2026 के पहले रिटयर्ड हुए हैं. एसोसिएशन ने वित्त मंत्रालय से 8वें CPC के 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' (ToR) में संशोधन करने के लिए गुहार लगाई है, जिससे कि इन पेंशनभोगियों के लिए पेंशन और पारिवारिक पेंशन में संशोधन के प्रावधानों को शामिल किया जा सके.

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क्या लिखा है पत्र में?REWA के द्वारा ये पत्र 7 सितंबर 2026 को लिखा गया था, जिसमें उसके जनरल सेक्रेटरी साधु सिंह ने 6.9 मिलियन पेंशनर्स और उनके परिवार की तरफ से चिंता जाहिर की थी. एसोसिएशन ने कहा कि उन्हें इस बात को लेकर काफी ज्याजा कंफ्यूजन है कि 8वें वेतन आयोग में उन्हें रखा जाएगा या नहीं. यानी कि उनकी पेंशन बढ़ेगी भी या नहीं.

REWA ने जताई चिंताउन्होंने नवंबर 2025 में जारी 8वें CPC के ToR का हवाला देते हुए लिखा कि, ToR के पॉइंट नंबर 2(e) में ये कहा गया है कि कमीशन कर्मचारियों के लिए NPS/UPS और NPS के दायरे से बाहर की पेंशन और डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी के स्ट्रक्चर की समीक्षा करेगा. REWA ने ये भी कहा कि इसमें सिर्फ अभी काम कर रहे कर्मचारियों की पेंशन का जिक्र है और पूर्व कर्मचारियों, यानी जो लोग 1 जनवरी, 2026 से पहले रिटायर हुए हैं उन पेंशनभोगियों की पेंशन और फैमिली पेंशन में बदलाव के बारे में साफ तौर पर कुछ नहीं लिखा गया है.

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7वें वेतन आयोग में था जिक्रइसी के साथ एसोसिएशन ने ये भी दावा किया कि पिछले वेतन आयोगों के ToR में पेंशन और पारिवारिक पेंशन में संशोधन के प्रावधानों का साफ तौर पर जिक्र था. 7वें वेतन आयोग के ToR का जिक्र करते हुए एसोसिएशन ने कहा कि ToR में पेंशन संशोधन को लेकर स्पष्टता थी. ऐसे में इस बार भी आयोग को स्पष्टता रखना चाहिए, जिससे कि पेंशनभोगियों को और उनके परिवार को भी लाभ मिल सके.

इतना ही नहीं बल्कि REWA ने प्रधानमंत्री से ये भी कहा कि जब तक कोई औपचारिक संशोधन जारी नहीं किया जाता, तब तक सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए या प्रेस रिलीज जारी करना चाहिए, जिससे कि पेंशनभोगियों के बीच फैली उलझन दूर हो सके. इससे लाखों वरिष्ठ नागरिकों को न्याय और मानसिक शांति मिलेगी.