8वें वेतन आयोग के गठन के बाद से ही लगातार इसकी सिफारिशों का इंतजार किया जा रहा है. देश के अलग- अलग राज्यों में फिलहाल आयोग की बैठकें चल रही हैं. इन बैठकों में कर्मचारियों से लेकर पेंशनर्स तक सभी की मांगों पर विचार किया जा रहा है. इसी बीच कई पेंशन को लेकर भी बड़ी बहस चल रही है.

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इस बहस का कारण है OPS और NPS, कई संगठनों की मांग है कि OPS यानी ओल्ड पेंशन स्कीम को वापस लाया जाए, जिससे कि उन्हें गारंटीड पेंशन मिल सके.

क्यों उठ रही OPS बहाली की मांग?केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 1 जनवरी 2004 से NPS लागू हुई है. इसमें कर्मचारी और सरकार दोनों योगदान करते हैं. रिटायरमेंट के समय मिलने वाला फायदा निवेश के परफॉर्मेंस और जमा रकम पर निर्भर करता है. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इससे रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन को लेकर अनिश्चितता रहती है. इसके मुकाबले OPS यानी ओल्ड पेंशन स्कीम में रिटायरमेंट के बाद पेंशन पहले से तय नियमों के आधार पर मिलती थी. यही वजह है कि कई कर्मचारी संगठन NPS को हटाकर OPS लागू करने की मांग कर रहे हैं.

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UPS भी बना चर्चा का विषयसरकार ने NPS के तहत UPS यानी यूनिफाइड पेंशन स्कीम लागू की है. इसे 1 अप्रैल 2025 से लागू किया गया है. UPS में 25 साल की मिनिमम सर्विस करने के बाद रिटायर होने पर नौकरी के आखिरी 12 महीनों के में जो बेसिक वेतन था, उसका 50% पेंशन के रूप में मिलता है. तो वहीं 10 साल की सर्विस के बाद मिनिमम 10 हजार रुपये पेंशन के रूप में देने का प्रावधान है.

हालांकि, कर्मचारी संगठनों का एक वर्ग अभी भी OPS जैसी गारंटीड पेंशन की मांग कर रहा है. कुछ संगठनों ने ये भी मांग की है कि NPS में शामिल कर्मचारियों को फिक्स सर्विस का समय पूरा करने के बाद OPS चुनने का ऑप्शन दिया जाना चाहिए.

OPS दो बारह लागू हो सकती है?फिलहाल OPS को दोबारा लागू करने का कोई फैसला नहीं हुआ है. केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 में संसद में बताया था कि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए OPS बहाल करने का कोई प्रस्ताव उस समय विचाराधीन नहीं था. इसलिए अभी OPS की वापसी या NPS में बड़ा बदलाव तय नहीं माना जा सकता. 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और उसके बाद सरकार के फैसले से ही तस्वीर साफ होगी.

8वें वेतन आयोग से हैं उम्मीदेंबता दें कि 8वें वेतन आयोग का गठन नवंबर 2025 में हुआ था और इसे अपनी रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है. आयोग कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और दूसरे लाभों से जुड़े मुद्दों पर कर्मचारी संगठनों से सलाह- मशविरा कर रहा है. जिसके लिए अलग- अलग राज्यों के अलग- अलग शहरों में बैठकों दौर चल रहा है.

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