8वां वेतन आयोग अभी परामर्श दौर पर है. यानी कि वेतन आयोग अभी विभिन्न राज्यों का दौरा कर अलग-अलग कर्मचारी संगठनों से मिलकर बैठकें कर रहा है. उनसे हर मुद्दे पर सुझाव लिए जा रहे हैं, जमीनी हकीकत का जायजा लिया जा रहा है. कर्मचारी संगठन भी इन बैठकों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं और खुलकर अपनी मांगे वेतन आयोग के सामने रख रहे हैं. जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय पैनल के सामने एक और ऐसा प्रस्ताव रखा गया है, जिस पर अगर मंजूरी मिल जाती है तो करीब 40 साल पुराना एक नियम बदल जाएगा. 

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40 साल पुराना कौन सा नियम?

बता दें कि यह पूरा मामला कम्युटेड पेंशन को बहाल करने की अवधि से जुड़ा हुआ है. मौजूदा नियमों के मुताबिक, केंद्र सरकार के कर्मचारी रिटायरमेंट के वक्त अपनी बेसिक पेंशन का 40% तक कम्युट करवा सकते हैं यानी कि समय से पहले उसे एकमुश्त निकलवा सकते हैं. इसके बदले सरकार कम्युट किए गए हिस्से को मंथली पेंशन से काट लेती है और मौजूदर नियम के तहत काटी गई पेंशन 15 साल बाद बहाल कर दी जाती है.

कम्युटेड पेंशन के तहत, सरकार रिटायरमेंट के वक्त अगले 98 महीनों (यानी 8 साल 2 महीने) के हिस्से का पैसा एडवांस में देती है. इसके बदले यह पैसा हर महीने 15 साल तक आपकी मंथली पेंशन से कटता रहता है. कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि जब पैसा सिर्फ 8 साल 2 महीने (98 महीने) का मिलता है, तो हमसे 15 साल (180 महीने) तक कटौती करने का कोई तुक नहीं बनता. ब्याज समेत यह पैसा 11 से 12 साल में ही पूरा वापस मिल जाता है. कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग से सिफारिश की है कि 15 साल की इस लंबी अवधि को घटाकर 10 से 12 साल किया जाए. 

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100 रुपये के उदाहरण से कंफ्यूजन करें दूर

नेशनल काउंसिल ऑफ द जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी ने इस पूरे मसले को 100 रुपये की कम्युटेड पेंशन का उदाहरण देकर समझाया है. सबसे पहले बता दें कि यह  8.194 के कम्युटेशन फैक्टर पर बेस्ड है. इसका मतलब है कि सरकार आपकी कटी हुई मासिक पेंशन का 8.194 साल (यानी लगभग 8 साल और 2 महीने) का पैसा एक साथ जोड़कर एडवांस दे रही है.

61 साल की उम्र में 100 रुपये मासिक पेंशन कम्युट करने पर करीब 9,833 की एकमुश्त राशि मिलती है. इसके बाद अगले 15 साल तक मंथली पेंशन से इसी 100 रुपये की कटौती होती है. जब 10 साल में कुल 12,000  रुपये की कटौती हो रही है यानी कि इतने ही साल में जब कम्युट की गई राशि की भरपाई हो जा रही है, तो फिर 15 साल तक कटौती की ही क्यों की जा रही है. 

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