8th Pay Commission Salary Hike: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने बीते 28 अक्टूबर को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) के 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' को मंजूरी दे दी है. इसके अलावा, सरकार ने नए CPC का गठन और उसकी अधिसूचना भी जारी कर दी है. आयोग के गठन के 18 महीनों के भीतर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपने होंगे. आठवें वेतन आयोग के तहत रक्षा सेवा कर्मियों सहित लगभग 50 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारी और लगभग 69 लाख पेंशनभोगियों को फायदा होगा.

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क्यों आठवां वेतन आयोग सबसे महंगा? 

बताया जा रहा है कि आठवां वेतन आयोग भारत के इतिहास का अब तक का सबसे महंगा वेतन संशोधन होगा क्योंकि कर्मचारियों और पेंशनर्स की संख्या में हुए भारी इजाफे और फिटमेंट फैक्टर व भत्तों में बड़े बदलावों की मांग के कारण इस बार सरकारी खजाने पर अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय बोझ पड़ने का अनुमान है. आठवें वेतन आयोग के तहत होने वाले सैलरी रिवीजन से 1.2 करोड़ से अधिक परिवार प्रभावित होंगे. इनमें लगभग 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारी और 65 लाख से अधिक पेंशनर्स शामिल हैं. 

अभी 7वें वेतन आयोग के तहत मिनिमम बेसिक सैलरी 18000 रुपये है. 8वें वेतन आयोग के तहत विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने फिटमेंट फैक्टर को 1.92 से लेकर 3.83 गुना तक बढ़ाने की मांग की है. भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ जैसे संगठनों ने तो न्यूनतम मूल वेतन को 18000 से बढ़ाकर 72000 (4 गुना फिटमेंट फैक्टर) करने का प्रस्ताव रखा है.  

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भत्तों को भी बढ़ाने का प्रस्ताव

अखिल भारतीय एनपीएस कर्मचारी महासंघ जैसे संगठनों ने बड़े शहरों में रहने की बढ़ती लागत को देखते हुए HRA को 30%, 20% और 10% से बढ़ाकर क्रमश: 36%, 24% और 12% करने की मांग की है. चूंकि सभी भत्ते बेसिक सैलरी के हिसाब से तय होते हैं इसलिए बेसिक सैलरी बढ़ेगी, तो भत्तों पर खर्च भी अपने आप ही बढ़ जाएगा. हाल की रिपोर्टों से पता चलता है कि 8वें वेतन आयोग के तहत बढ़ी हुई सैलरी और पेंशन पर टोटल खर्च 4 लाख करोड़ से ज्यादा पहुंच सकता है. पिछली लगभग पांच तिमाहियों के एरियर (बकाया राशि) को मिलाकर कुल वित्तीय बोझ 9 लाख करोड़ के करीब पहुंच सकता है, जिससे यह अब तक का सबसे महंगा सैलरी रिविजन बन सकता है.

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