Eighth Pay Commission Formation: करीब एक करोड़ से अधिक केंद्रीय वेतनभोगी कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए बड़ी खबर है. केंद्र सरकार ने मंगलवार को औपचारिक रूप से आठवें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है. सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई आयोग की चेयरमैन होंगी, जबकि आईआईएम बेंगलुरू के प्रोफेसर पुलक घोष और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) के सचिव पंकज जैन को इसके सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है.

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सिफारिशें भेजने के लिए 18 महीने का समय 

आयोग अपनी सिफारिशें अगले 18 महीनों के भीतर सरकार को सौंपेगा, जिसके बाद वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी वर्ष 2027 से लागू हो सकती है. कैबिनेट की बैठक के बाद जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि आठवें वेतन आयोग के लिए टर्म ऑफ रेसरेंस को मंजूरी दी गई है. वेतन आयोग में एक अध्यक्ष, एक सदस्य (पार्ट टाइम) और एक सदस्यीय सेक्रेटरी होंगे. इसके गठन के बाद सिफारिशें भेजने के लिए वेतन आयोग को अठारह महीने का समय दिया गया है.

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NC-JCM (स्टाफ साइड) सेक्रेटरी शिव गोपाल मिश्रा का कहना है कि 8वें वेतन आयोग को लागू करने में भले ही देरी हो सकती है, लेकिन यह 1 जनवरी 2026 से ही प्रभावी माना जाएगा. यानी, इसमें अगर देरी होती है तो फिर 1 जनवरी 2026 से स्टाफ को एरियर जोड़कर दिया जा सकता है.

2027 में एरियर के साथ बढ़ी सैलरी! 

इससे पहले जब सातवें वेतन आयोग को लागू किया गया था, उस समय भी देरी हुई थी और सभी कर्मचारियों और वेतनभोगियों को एरियर दिया गया था. केन्द्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनधारकों को रिप्रजेंट करने वाले फोरम एनसी-जीसीएम की तरफ से जनवरी में ही केन्द्र सरकार को टर्म ऑफ रेफरेंस सौंपा जा चुका है.

गौरतलब है कि देश में बढ़ती महंगाई और अन्य चीजों को देखते हुए हर 10 साल पर नए वेतन आयोग का गठन किया जाता है, जिसमें केन्द्रीय कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाओं को संशोधित किया जाता है. इस हिसाब से अगर देखा जाए तो 1 जनवरी 206 से आठवें वेतन आयोग को प्रभावी होना माना जाएगा.

इस साल जनवरी में आठवें वेतन आयोग के गठन का ऐलान किया गया था, लेकिन केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिलने में करीब 10 महीने का समय लग गया. इस देरी को लेकर सरकारी कर्मचारियों और उनके संगठनों में नाराजगी के स्वर उठ रहे थे.

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