एक्सप्लोरर

BLOG: बीजेपी की केरल वाली जनरक्षा यात्रा : कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना!

पिछले साल यूपी में पार्टी को मिली अप्रत्याशित बड़ी सफलता और फिर योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद पार्टी का रुख और आक्रामक हुआ है. केरल में जहां अलिखित-सा नियम है कि पांच साल कांग्रेस गठजोड़ और पांच साल सीपीएम की अगुवाई वाला मोर्चा सत्ता में रहता है, बीजेपी आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्याओं का मुद्दा उछालकर इसी नियम को चुनौती देने की कोशिश करती दिखने की कोशिश कर रही है.

यह इत्तेफाक नहीं है कि केरल में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ताओं की हत्याओं के मुद्दे ने पिछले कुछ महीनों से तूल पकड़ा है. बीजेपी इस समय अपनी आर्थिक नीतियों (नोटबंदी और जीएसटी), बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी को लेकर चारों तरफ से घिरी हुई है. विपक्षी दल ही नहीं, पार्टी के अन्दर से भी विरोधी स्वर गूंजने लगे हैं.

वैसे तो यह यात्रा 7 सितम्बर को निकाली जाने वाली थी पर उस समय पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के अन्य कार्यक्रमों में व्यस्त होने के कारण यात्रा को स्थगित किया गया था. इस बीच दो घटनाएं घटीं, जिन्होंने बीजेपी के माथे पर बल बढ़ा दिए. करीब सवा महीना पहले पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या पर देश भर में स्वतःस्फूर्त आक्रोश फैला और चूंकि गौरी घोषित हिन्दुत्ववादी राजनीति की आलोचक थीं; इस हत्या को नरेन्द्र दाभोलकर, गोविन्द पानसारे और एम. एम. कलबुर्गी जैसे रैशनलिस्टों की हत्या से जोड़कर देखा गया.

आरएसएस और बीजेपी ने अपने बचाव के लिए इस तथ्य की शरण ली कि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार थी और कानून और व्यवस्था राज्य का विषय है. गौरी लंकेश की हत्या को लेकर सोशल मीडिया में हुई भर्त्सना के दौरान ही केरल में आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्या का मुद्दा इस कुतर्क के साथ उछाला गया था कि गौरी लंकेश की हत्या पर बवाल मचाने वाले केरल में हो रही हत्याओं पर क्यों चुप्पी साधे हुए हैं?

दूसरी घटना बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में छात्राओं के साथ हुई छेड़छाड़ के खिलाफ अभूतपूर्व आन्दोलन की थी. बात सिर्फ इतनी थी कि एक छात्रा से छेड़छाड़ की घटना के बाद सुरक्षा बढ़ाने की मांग को लेकर छात्राएं कुलपति से मिलना चाहती थीं. उसी समय प्रधानमंत्री बनारस में एक कार्यक्रम में जाने वाले थे. कुलपति का छात्राओं से न मिलना और फिर प्रदर्शन कर रही छात्राओं पर लाठीचार्ज के कारण मुद्दे ने तूल पकड़ लिया. बीजेपी को इस मुद्दे पर भी रक्षात्मक रुख अपनाना पड़ा.

ऊपर से गुजरात और हिमाचल में चुनाव दो महीने की अवधि में होने जा रहे हैं. ऐसे में बीजेपी को डैमेज कंट्रोल करने के लिए कुछ करना ज़रूरी था. पार्टी जब भी फंसती है, उसे 'हिन्दू' कार्ड में ही शरण दिखता है. केरल में बीजेपी की 'जनरक्षा यात्रा' को इसी सन्दर्भ में देखा जाना चाहिए.

बीजेपी काफी समय से दक्षिण में पांव जमाने की कोशिश कर रही है पर उसे कोई बड़ी सफलता नहीं मिली. कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु में पार्टी ने फिर भी कभी जूनियर पार्टनर रहकर तो कभी अकेले भी (कर्नाटक में) सत्ता का स्वाद चखा है पर केरल में पार्टी की दाल कभी नहीं गली. पिछले पांच सालों में पार्टी का वोट प्रतिशत हालांकि मामूली रूप से बढ़ा है. पर यह पार्टी भी जानती है कि केरल में शोर मचाकर कोई तख्तापलट नहीं होने वाला!

पिछले साल यूपी में पार्टी को मिली अप्रत्याशित बड़ी सफलता और फिर योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद पार्टी का रुख और आक्रामक हुआ है. केरल में जहां अलिखित-सा नियम है कि पांच साल कांग्रेस गठजोड़ और पांच साल सीपीएम की अगुवाई वाला मोर्चा सत्ता में रहता है, बीजेपी आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्याओं का मुद्दा उछालकर इसी नियम को चुनौती देने की कोशिश करती दिखने की कोशिश कर रही है.

तीन अक्तूबर से पार्टी ने केरल के कन्नूर जिले से 'जनरक्षा' यात्रा शुरू की. यात्रा में शाह से लेकर योगी तक ने केरल की सीपीएम सरकार को निशाना बनाया पर कई सारे मुद्दों पर बीजेपी के दांव उलटे पड़ने लगे. 'लव जिहाद' हो या शिक्षा हो या स्वास्थ्य हो, केरल को घेरने के चक्कर में बीजेपी नेताओं ने बेतुकी बयानबाजी ही की. सोशल मीडिया पर पार्टी की खूब किरकिरी हुई, जहां योगी को पहले यूपी को 'संभालने' की सलाह दी गयी. इस बीच अचानक शाह को यात्रा बीच में छोड़ कर दिल्ली जाना पड़ा, उसका भी गलत संकेत गया. फिर सीपीएम और कांग्रेस में फर्क यह है कि कांग्रेस जहां बीजेपी की सांप्रदायिक राजनीति को लेकर अपोलोजेटिक रहती है, वहीं सीपीएम आक्रामकता से मुकाबला करती है. सीपीएम ने भी बीजेपी के कार्यालयों पर धरने प्रदर्शन शुरू कर दिए. सीपीएम ने 'लोकल सेंटिमेंट' कार्ड खेलते हुए यह भी आरोप लगाए कि बीजेपी केरल का माहौल और छवि ख़राब करने की कोशिश कर रही है.

बीजेपी ने अगर अपने 200 कार्यकर्ताओं (जिनकी हत्या हुई है) की सूची दी है तो सीपीएम ने भी 205 कार्यकर्ताओं की सूची दी है. इस तरह बीजेपी के 'विक्टिम' कार्ड की धार को कुछ हद तक भोथरा किया है. दरअसल केरल में राजनीतिक हत्याओं का सिलसिला पिछले दो दशकों से चल रहा है और दोनों पक्ष इसमें शामिल रहे हैं. इसलिए किसी एक पक्ष का अचानक उठकर यह कहना कि हमारे कार्यकर्ता मारे जा रहे हैं, कम से कम केरलवासियों के गले तो नहीं उतर रहा. हां, केरल से बाहर बीजेपी की इस 'जनरक्षा यात्रा' का 'नुइसेंस वैल्यू' ज़रूर है. यह बात बीजेपी भी जानती है. चूंकि केंद्र और कई राज्यों में बीजेपी सत्ता में है इसलिए मीडिया के एक हिस्से ने इस मुद्दे को उछाला है. बीजेपी को लगता है कि इस शोरशराबे और प्रचार का फायदा उसे गुजरात और हिमाचल प्रदेश में होने जा रहे विधानसभा चुनावों में मिल सकता है.

इसमें भी हिमाचल में पार्टी को इतनी दिक्कत नहीं है लेकिन गुजरात का चुनाव पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है. यहां आरक्षण के लिए पटेलों के आन्दोलन, ऊना वाली घटना के बाद दलितों में बीजेपी के खिलाफ बढ़ता रोष और एकजुटता के साथ 'विकास पागल हो गया है' के नारे ने बीजेपी की परेशानियां बढ़ा दी हैं. ऐसे ही नहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, जो कभी कोई घोषणा करने के बाद अपने कदम पीछे नहीं लेते, की सरकार को जीएसटी में व्यापारियों के लिए राहत की घोषणाओं के अलावा तीन साल में पहली बार पेट्रोल और डीज़ल के केंद्रीय शुल्क में कटौती कर दामों को दो रुपये सस्ता करने की घोषणा करनी पड़ी.

गरज यह कि केरल में बीजेपी की 'जनरक्षा' यात्रा का उद्देश्य लोगों का ध्यान असली मुद्दों से हटाकर अपनी हिन्दुत्ववादी छवि को और निखारना और गुजरात चुनाव जीतना है. हालांकि पार्टी कितनी कामयाब होती है, यह दिसंबर के बाद ही पता चलेगा.

लेखक से ट्विटर पर जुड़ने के लिए क्लिक करें-  https://twitter.com/VijayshankarC

और फेसबुक पर जुड़ने के लिए क्लिक करें-  https://www.facebook.com/vijayshankar70/

(नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.)

View More

ओपिनियन

Sponsored Links by Taboola
25°C
New Delhi
Rain: 100mm
Humidity: 97%
Wind: WNW 47km/h

टॉप हेडलाइंस

'नॉट अवर बिजनेस,' ईरान के युद्धपोत को डुबाने पर कांग्रेस ने सरकार पर उठाए सवाल तो BJP ने दिया जवाब
'नॉट अवर बिजनेस,' ईरान के युद्धपोत को डुबाने पर कांग्रेस ने सरकार पर उठाए सवाल तो BJP ने दिया जवाब
नीतीश कुमार के फैसले से उनके गांव के ही लोग नहीं खुश! कहा- RJD को देंगे समर्थन
नीतीश कुमार के फैसले से उनके गांव के ही लोग नहीं खुश! कहा- RJD को देंगे समर्थन
चीन ही नहीं, भारत को भी मिलेगी राहत... ईरान के ऐलान ने अमेरिका-यूरोप की बढ़ाई टेंशन, अब क्या करेंगे ट्रंप?
चीन ही नहीं, भारत को भी मिलेगी राहत! ईरान के ऐलान ने US-यूरोप की बढ़ाई टेंशन, क्या करेंगे ट्रंप?
ये दो ओवर रहे भारत की जीत के टर्निंग प्वाइंट, वरना इंग्लैंड ने कर दिया था 'खेला'; चेज हो जाते 254 रन
ये दो ओवर रहे भारत की जीत के टर्निंग प्वाइंट, वरना इंग्लैंड चेज कर देता 254 रन
ABP Premium

वीडियोज

UP News: Hathras में भयंकर सड़क हादसा Etah-Aligarh Highway पर स्कॉर्पियो ने बाइक में मारी टक्कर
Chitra Tripathi: बेटे Nishant की लॉन्चिंग के लिए Nitish Kumar ने BJP को सौंपी सत्ता? | JDU | Bihar
Bharat Ki Baat: बिहार में BJP से CM की रेस में कौन आगे, क्या होगा फॉर्मूला? | Nitish Kumar | JDU
Sandeep Chaudhary: बिहार का CM कौन...BJP क्यों है मौन? | Nitish Kumar | Bihar | BJP | JDU
Bihar Politics: दिल्ली में Nitish Kumar..बिहार में BJP? निषाद या महिला कौन होगी मुख्यमंत्री? | JDU

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
'नॉट अवर बिजनेस,' ईरान के युद्धपोत को डुबाने पर कांग्रेस ने सरकार पर उठाए सवाल तो BJP ने दिया जवाब
'नॉट अवर बिजनेस,' ईरान के युद्धपोत को डुबाने पर कांग्रेस ने सरकार पर उठाए सवाल तो BJP ने दिया जवाब
नीतीश कुमार के फैसले से उनके गांव के ही लोग नहीं खुश! कहा- RJD को देंगे समर्थन
नीतीश कुमार के फैसले से उनके गांव के ही लोग नहीं खुश! कहा- RJD को देंगे समर्थन
चीन ही नहीं, भारत को भी मिलेगी राहत... ईरान के ऐलान ने अमेरिका-यूरोप की बढ़ाई टेंशन, अब क्या करेंगे ट्रंप?
चीन ही नहीं, भारत को भी मिलेगी राहत! ईरान के ऐलान ने US-यूरोप की बढ़ाई टेंशन, क्या करेंगे ट्रंप?
ये दो ओवर रहे भारत की जीत के टर्निंग प्वाइंट, वरना इंग्लैंड ने कर दिया था 'खेला'; चेज हो जाते 254 रन
ये दो ओवर रहे भारत की जीत के टर्निंग प्वाइंट, वरना इंग्लैंड चेज कर देता 254 रन
'ये उसका रोज का है' अनुराग डोभाल के वायरल वीडियो पर भाई ने किया रिएक्ट, बोले- 'वो बीवी को मारता था'
'ये उसका रोज का है' अनुराग डोभाल के वायरल वीडियो पर भाई ने किया रिएक्ट, बोले- 'वो बीवी को मारता था'
खामेनेई की मौत के 5 दिन बाद भारत ने जताया दुख, ईरानी दूतावास पहुंचे विदेश सचिव विक्रम मिसरी, लिखा शोक संदेश
खामेनेई की मौत के 5 दिन बाद भारत ने जताया दुख, ईरानी दूतावास पहुंचे विदेश सचिव विक्रम मिसरी, लिखा शोक संदेश
Citroen Basalt Vs Kia Syros: इंजन और फीचर्स के मामले में कौन सी SUV है बेहतर? यहां जानें अंतर
Citroen Basalt Vs Kia Syros: इंजन और फीचर्स के मामले में कौन सी SUV है बेहतर? यहां जानें अंतर
Strait of Hormuz: क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जानें कैसे मिला था इसे इसका यह नाम?
क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जानें कैसे मिला था इसे इसका यह नाम?
Embed widget