भारत और उसके पड़ोसी देशों के बीच जब संबंधों की बात आती है तो बांग्लादेश का नाम आना लाजिमी है.  5 अगस्त 2024 को छात्र आंदोलन और जन विद्रोह के कारण शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा. इससे यह साफ हो गया कि बांग्लादेश एक बड़े सामाजिक-राजनीतिक बदलाव और नई पहचान की ओर बढ़ रहा है. लेकिन, पड़ोसी देश होने के नाते भारत इस नए बदलाव को सही से समझ नहीं पाया.

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इसके बाद, 12 फरवरी 2026 को बांग्लादेश में चुनाव हुए, जिसमें तारीक रहमान की अगुवाई वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने जीत हासिल की. 17 साल बाद देश लौटे तारीख रहमान की जीत से अमेरिका और चीन जैसे देश हैरान नहीं थे, क्योंकि दोनों ही देश विपक्षी पार्टी 'जमात-ए-इस्लामी' को सत्ता में नहीं देखना चाहते थे.

नहीं रहे पहले जैसे भारत-बांग्लादेश रिश्ते

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भारत के रिश्ते पहले की शेख हसीना सरकार (अवामी लीग) के साथ बहुत मजबूत थे. लेकिन उनके हटने के बाद रिश्तों में खटास आ गई. अगस्त 2024 से फरवरी 2025 तक नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस की अगुवाई में अंतरिम सरकार चली. भारत ने इस सरकार को "अवैध और असंवैधानिक" बताया, जिससे दोनों देशों में पिछले 20 सालों में सबसे बड़ा तनाव पैदा हो गया.

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों की खबरों ने भारत की चिंता और नाराजगी को और बढ़ा दिया. सुरक्षा कारणों का हवाला देकर दोनों देशों ने एक-दूसरे के नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं सीमित कर दीं. नई दिल्ली और कोलकाता में बांग्लादेशी दूतावासों के बाहर हुए प्रदर्शनों के बाद अंतरिम सरकार ने भारतीयों के लिए केवल बिजनेस और नौकरी वीजा को ही चालू रखा था.

शेख हसीना इस समय भारत में किसी गुप्त जगह पर रह रही हैं. वे वहां से सोशल मीडिया के जरिए बांग्लादेश की नई सरकार पर लगातार निशाना साध रही हैं, जिससे ढाका की सरकार नाराज है. बांग्लादेश में उन पर 'मानवता के खिलाफ अपराधों' का मुकदमा चलाने के लिए उनके प्रत्यर्पण (वापसी) की मांग उठ रही है.

कूटनीतिक सुधार की कोशिशें

चुनाव के बाद एक लोकतांत्रिक सरकार बनने पर उम्मीद थी कि रिश्ते सुधरेंगे. वीजा सेवाएं फिर से शुरू हो चुकी हैं और भारत रिश्तों को सुधारने की कोशिश कर रहा है. तारीख रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में भारत के लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला शामिल हुए. इसके बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने भारत का दौरा किया और भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर व एनएसए अजीत डोभाल से मुलाकात की.

भारत ने एक पारंपरिक राजनयिक के बजाय अनुभवी नेता दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में अपना नया राजदूत नियुक्त किया है, ताकि राजनीतिक स्तर पर बातचीत को मजबूत किया जा सके.

नए विवाद और चुनौतियां

तमाम कोशिशों के बावजूद दोनों देशों के बीच अविश्वास की दीवार अभी भी खड़ी है, जिसके मुख्य कारण ये हैं: भारत और बांग्लादेश के बीच की 30 साल पुरानी गंगा जल संधि दिसंबर 2026 में खत्म हो रही है. बांग्लादेश के लिए इसका नवीनीकरण (रिन्यूअल) सबसे बड़ी प्राथमिकता है. तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे का मुद्दा 2011 से अटका हुआ है. अब चूंकि पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार है और शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री हैं, तो केंद्र सरकार सारा दोष पिछली राज्य सरकार पर नहीं मढ़ सकती. हालांकि, शुभेंदु अधिकारी ने अपने चुनाव अभियान में बांग्लादेश से होने वाली अवैध घुसपैठ को बड़ा मुद्दा बनाया था, जिससे उन पर कड़ा रुख अपनाने का दबाव रहेगा.

दोनों देशों के बीच 4,156 किलोमीटर लंबी सीमा है. भारत की सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा सीमा पर की जाने वाली कार्रवाई और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के उस बयान से ढाका नाराज है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार रात के समय अवैध प्रवासियों को वापस बांग्लादेश की तरफ "पुशबैक" (धकेल) कर रही है. भारत ने बांग्लादेश से 2,860 ऐसे लोगों की नागरिकता की जांच करने को कहा है जिन्हें वह बांग्लादेशी मानता है, लेकिन ढाका ने अभी तक इस पर कोई जवाब नहीं दिया है.

चीन-पाकिस्तान से नजदीकियां

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता बांग्लादेश का चीन और पाकिस्तान की तरफ झुकाव है: बांग्लादेश के विदेश मंत्री के चीन दौरे के बाद अब प्रधानमंत्री तारीख रहमान भी बीजिंग की यात्रा पर जाने वाले हैं. 1971 में पाकिस्तान से आजाद होने के बाद पहली बार बांग्लादेश ने अपने सरकारी अधिकारियों (सिविल सर्वेंट्स) को ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान भेजने का फैसला किया है, जो भारत के लिए एक बड़ा सुरक्षा अलर्ट है. जाहिर है भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्तों को फिर से सामान्य करना (Reset) अभी एक दूर का लक्ष्य नजर आता है. ऐतिहासिक मतभेद, सीमा विवाद, पानी का बंटवारा और बदलती हुई भू-राजनीति (Geopolitics) इस रास्ते की सबसे बड़ी रुकावटें हैं.

[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही ज़िम्मेदार है.]