सफेद चक चक कुर्ता पायजामा, क्लीन शेव, आंखों में चमक, शब्द और भाव का, जोश और संयम का भरपूर तालमेल...संसद के सियासी शतरंज में शह मात तो पहले से लगभग तय है लेकिन राहुल गांधी के इस बदले रूप ने सबको चौंका दिया. सत्ता पक्ष को गुस्से का प्रतीक बताते हुए राहुल गांधी ने कांग्रेस, हिन्दू और हिन्दुस्तान का मतलब जाते जाते पीएम नरेंद्र मोदी से गले लगकर समझा दिया. आज राहुल अपने भाषण और लहजे से यह स्थापित करने की कोशिश में थे कि सत्तापक्ष स्वभाव से दंभी है और वे लोग "राज धर्म" को भूल गये हैं.

अब राजनीति के विशेषज्ञ, पक्ष और विपक्ष ये चर्चा करेंगे कि किसान, महिला, अल्पसंख्यक, रोजगार आदि विषयों पर राहुल गांधी ने क्या कहा. लेकिन यहां सिर्फ बात आज लजीज लहजे की. राहुल ने कहा कि आप मुझे पप्पू कहें, कितनी भी गाली दें..लेकिन मैं नफ़रत नहीं करता. राहुल ने अपने भाषण में कांग्रेस का मतलब समझाते हुए कहा, ''कोई अगर आपसे नफरत करता है तो भी उसे गले लगाओ.'' राहुल ने कहा, ''आप लोगों के अंदर मेरे लिए नफरत है. आप मुझे पप्पू और बहुत गालियां देकर बुला सकते हैं. लेकिन मेरे अंदर आपके लिए नफरत नहीं है.'' यह बोलते बोलते राहुल गांधी अचानक पीएम के पास जाते हैं और उनके गले लगते हैं. पहले पीएम चौंक जाते हैं.. अचानक संभलते हैं और फिर राहुल को वापस बुलाकर पीठ ठोंकते हैं. यहां राहुल ने नफरत का जवाब प्यार ...कुछ इसी प्रतीक को प्लांट कर दिया. अब सोशल मीडिया ट्रोल्स हों या बीजेपी के बड़े नेता सभी का राहुल का मजाक उड़ाना सियासी रूप से भारी पड़ जाएगा. ठीक वैसे ही जैसे कांग्रेस के बड़े नेताओं का पीएम मोदी का मजाक उड़ाना 2014 में भारी पड़ गया. लोकसभा चुनाव में चाय वाला बोलना हो या गुजरात चुनाव के दौरान 'नीच' बोलना.

अब दूसरे बयान पर ध्यान दीजिए. राहुल ने अपने भाषण के आखिरी में तंज भरे लहजे में कहा कि बीजेपी, आरएसएस ने हमें कांग्रेस का मतलब समझाया. इन्होंने हिंदू और शिवजी का मतलब समझाया. कांग्रेस का मतलब है- कोई अगर आपसे नफरत करता है उसके बाद भी उसे गले लगाओ. अब थोड़ा वक्त का पहिया पीछे ले चलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से 'मिशन 2019' का बिगुल फूंकते हुए राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष कहते हैं कांग्रेस मुस्लिमों की पार्टी है, लेकिन ये नहीं बताते क्या सिर्फ मुस्लिम पुरुषों की पार्टी है या महिलाओं की भी है? आज राहुल गांधी ने बीजेपी के इसी चुनावी तीर को धराशायी करने के लिए कांग्रेस की विचारधार और हिन्दू संस्कृति को एक दूसरे का पर्याय, सहनशील, उदारवादी, प्रेम और सौहार्दपूर्ण जीवनशैली, साझा विरासत का वाहक के रूप में स्थापित करने की कोशिश की.

विकास के जिस 'पुष्पक विमान' पर सवार होकर नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री आवास से सात लोक कल्याण मार्ग दिल्ली तक पहुंचे वह अब आंकड़ों के उलझनों के मकड़जाल में फंसा हुआ है. वक्त का पहिया 2014 तक ले चलें तो आपको ध्यान आएगा कि हिन्दुत्व के चेहरे के साथ ही साथ विकास और ब्रांड की इमेज के सहारे नरेंद्र मोदी पीएम पद पर आसीन हो गए. आज 2019 के लिए आम जन को सियासी संदेश देते हुए राहुल गांधी ने उस पर भी जोरदार हमला बोला. हमला बोलते वक्त शब्दों में बॉडी लैंग्वेज का जोरदार तड़का लगाया. राहुल ने कहा कि 'मोदी की मार्केटिंग में बिजनेसमैन पैसा लगाते हैं'. यह बोलकर अब सोशल मीडिया से लेकर आम जन को 2019 के लिए राहुल गांधी ने बड़ा संदेश दे दिया.

स्वामी अग्निवेश के साथ मारपीट हो या गोरक्षा के नाम पर भीड़तंत्र का फैसला. भाषा और विचार को सामने रखकर, हिंसा को जायज ठहराया जा रहा है. ऐसे वक्त में संसद के मंच से राहुल पूरे जोश में बोल रहे थे ....लोग मारे जा रहे हैं पीटे जा रहे हैं प्रधानमंत्री के मुंह से एक शब्द नहीं निकलता.. इस तरह का बयान देकर राहुल सारी हिंसा का ठीकरा पीएम मोदी के सिर मढ़ रहे थे.

एक दूसरे पर संसद से सड़क तक तीखा हमला करने वाले दो बड़े नेता गले लग रहे हैं, दोनों के लिबास में सफेदी बस अंतर सिर्फ बालों के कलर में है. यह अंतर दो पीढी का है. शायद यही संदेश राहुल गांधी आगे बढ़कर गले लगने जाते हुए पूरे देश को देना चाहते हैं. वह कांग्रेस का मतलब शब्दों के साथ बताते हुए इस सियासी स्क्रिप्ट के एक्ट से सिर्फ मीडिया का ही नहीं पूरे देश का ध्यान खींचा.

शिष्‍टाचार की यह सुंदर कहानी के रूप में गढ़ी जाएगी. जब जब राहुल गांधी पर सोशल मीडिया या सड़क पर व्यक्तिगत हमले होंगे यह तस्वीर राहुल को सियासी माइलेज देगी. गले मिलने के बाद बैठते वक्त राहुल गांधी ने अपने किसी सहकर्मी की तरफ देखकर एक आंख दबा दी. संसदीय लिहाज से यह उचित है या अनुचित यह तो संविधान विशेषज्ञ बताएंगे लेकिन यह तस्वीर भी जीवंत होने का संदेश दे गई. वैसे स्पीकर सुमित्रा महाजन ने इस पर नाराजगी जतायी. जैसे अभी फीफा वर्ल्डकप में क्रोएशिया की राष्ट्रपति ने ओहदे के भारी भरकम तमीज को पीछे छोड़कर जीवंत होने का संदेश दिया. भावनाओं की साधारण कसौटी पर राहुल ने शानदार स्क्रिप्ट लिखने की कोशिश की है.. इसका कितना सियासी माइलेज मिलेगा यह भविष्य के गर्भ में छुपा है.

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