प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से फ्यूल बचाने और जहां संभव हो वहां वर्क फ्रॉम होम अपनाने की अपील की है. ऐसे समय में भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री भी ऐसे विकल्पों पर तेजी से काम कर रही है, जो पेट्रोल और डीजल की खपत कम कर सकें. इसी वजह से अब Hybrid कारों की चर्चा तेजी से बढ़ रही है. भारत में फिलहाल सबसे ज्यादा कारें पेट्रोल इंजन के साथ बिकती हैं. डीजल कारों की भी अच्छी मांग है, लेकिन वे ज्यादातर बड़ी SUVs तक सीमित हैं. वहीं CNG कारें भी लोगों के बीच पॉपुलर हो रही हैं. लेकिन अब आने वाले समय में Hybrid कारें फ्यूल बचत का सबसे बड़ा विकल्प बन सकती हैं.

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Hybrid कारें कैसे करती हैं फ्यूल की बचत?

Hybrid कारों में पेट्रोल इंजन के साथ एक इलेक्ट्रिक मोटर भी दी जाती है. यही टेक्नोलॉजी इन्हें सामान्य पेट्रोल कारों से अलग बनाती है. कम स्पीड और ट्रैफिक जैसी स्थितियों में ये कारें सिर्फ बिजली पर चल सकती हैं. इससे पेट्रोल की खपत काफी कम हो जाती है. जब कार को ज्यादा ताकत की जरूरत होती है, तब पेट्रोल इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर दोनों मिलकर काम करते हैं. इससे बेहतर माइलेज मिलता है और इंजन पर दबाव भी कम पड़ता है. विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे Hybrid कारों की बिक्री बढ़ेगी, वैसे-वैसे देश में फ्यूल की खपत कम होगी. इससे तेल आयात पर खर्च होने वाला पैसा भी घट सकता है.

 मजबूत विकल्प बन रही हैं Hybrid कारें

बता दें कि इलेक्ट्रिक कारों की पॉपुलेरिटी बढ़ रही है, लेकिन अभी भी देश में उनकी संख्या काफी कम है. कई लोग चार्जिंग की परेशानी और लंबी दूरी की चिंता की वजह से EV खरीदने से बचते हैं. यहीं पर Hybrid कारें बेहतर विकल्प बनकर सामने आती हैं. इनमें चार्जिंग की जरूरत नहीं होती और फिर भी ये सामान्य पेट्रोल कारों से ज्यादा माइलेज देती हैं. यही वजह है कि कई बड़ी कंपनियां अब भारत में नई Hybrid कारें लॉन्च करने की तैयारी कर रही हैं. मारुति सुजुकी आने वाले समय में किफायती Hybrid कारों पर ज्यादा फोकस कर रही है. वहीं Hyundai समेत कई दूसरी कंपनियों ने भी Hybrid मॉडल लाने की बात कही है.

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SUV सेगमेंट में भी बढ़ेगा Hybrid का इस्तेमाल

भारत में SUV सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली कारों में शामिल हैं. आने वाले समय में Hybrid टेक्नोलॉजी वाली SUVs की संख्या बढ़ सकती है. इससे बड़ी गाड़ियों में भी फ्यूल की खपत कम होगी. Hybrid टेक्नोलॉजी न सिर्फ पेट्रोल-डीजल बचाने में मदद करेगी, बल्कि पर्यावरण को भी कम नुकसान पहुंचाएगी. इसके साथ ही कार मालिकों का फ्यूल खर्च भी कम होगा.

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