Vehicle Horn Facts: सड़क पर चलते समय आपने जरूर नोटिस किया होगा कि हर गाड़ी के हॉर्न की आवाज अलग होती है. किसी कार का हॉर्न हल्का और स्मूद लगता है, तो वहीं ट्रक और बस का हॉर्न काफी तेज और भारी सुनाई देता है. बाइक के हॉर्न की आवाज भी बाकी गाड़ियों से अलग होती है. ज्यादातर लोग इसे सिर्फ कंपनी का डिजाइन या स्टाइल समझते हैं, लेकिन इसके पीछे पूरा साइंस और सेफ्टी लॉजिक काम करता है.
हर वाहन का आकार, स्पीड और इस्तेमाल अलग होता है, इसलिए उसका हॉर्न भी अलग तरीके से डिजाइन किया जाता है. हॉर्न का असली मकसद सिर्फ आवाज निकालना नहीं बल्कि सड़क पर दूसरे लोगों को सही समय पर अलर्ट करना होता है. यही वजह है कि छोटी गाड़ियों और बड़े कमर्शियल वाहनों के हॉर्न में जमीन-आसमान का फर्क देखने को मिलता है.
गाड़ी के साइज और जरूरत के हिसाब से बदलती है आवाज
हर वाहन के हॉर्न की फ्रीक्वेंसी और साउंड लेवल अलग तय की जाती है. छोटी कारों और बाइक का हॉर्न ऐसा बनाया जाता है जो शहर के ट्रैफिक में आसानी से सुना जा सके लेकिन और ज्यादा परेशान करने वाला ना हो. वहीं ट्रक और बस जैसे बड़े वाहनों में भारी और तेज आवाज वाला हॉर्न लगाया जाता है ताकि दूर तक लोगों को अलर्ट किया जा सके. क्योंकि बड़े वाहन जल्दी नहीं रुकते, इसलिए उनका हॉर्न ज्यादा पावरफुल रखा जाता है.
इसके अलावा हाईवे और शहर के हिसाब से भी हॉर्न की डिजाइन अलग हो सकती है. कई प्रीमियम कार कंपनियां अपनी गाड़ियों के लिए खास ट्यून वाला हॉर्न तैयार करती हैं ताकि उनकी पहचान अलग लगे. यानी हॉर्न सिर्फ आवाज नहीं बल्कि वाहन की जरूरत और सेफ्टी का हिस्सा होता है.
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हॉर्न के पीछे छिपा है पूरा साइंस और सेफ्टी कनेक्शन
हॉर्न की आवाज Air Pressure और कंपन से बनती है. जब ड्राइवर हॉर्न दबाता है तो इलेक्ट्रिक सिस्टम एक डायफ्राम को कंपन देता है, जिससे आवाज पैदा होती है. अलग-अलग आकार और डिजाइन की वजह से हर हॉर्न का साउंड बदल जाता है. कुछ हॉर्न शार्प साउंड देते हैं तो कुछ डीप टोन में आवाज निकालते हैं. यही कारण है कि एंबुलेंस, पुलिस और फायर ब्रिगेड के सायरन भी बाकी गाड़ियों से अलग बनाए जाते हैं ताकि लोग तुरंत पहचान सकें.
हालांकि कई लोग तेज और मॉडिफाइड हॉर्न लगवा लेते हैं, जो कानों और सड़क सुरक्षा दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. इसलिए सरकार ने भी हॉर्न की आवाज को लेकर नियम बनाए हुए हैं. अगली बार जब सड़क पर अलग-अलग हॉर्न सुनें, तो समझ जाइए कि उसके पीछे सिर्फ शोर नहीं बल्कि पूरा साइंस और सेफ्टी सिस्टम काम कर रहा है.
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