E100 Fuel: भारत में बढ़ते प्रदूषण और कच्चे तेल के आयत को कम करने के लिए भारतीय सरकार कई तरह के योजना बना रही है. जिसका सबसे बड़ा सबूत देश में एथेनॉल है. भारतीय सरकार अब एथेनॉल को भारत का मुख्य फ्यूल बनाना चाहती है. जिससे विदेश से कच्चे तेल ना लाना पड़े और पेट्रोल-डीजल से होने वाले प्रदूषण भी कम हो सके. अभी हाल ही में E100 को मंजूरी मिल गई है.
लेकिन अभी पुरे देश में E20 फ्यूल ही मिल रहा है. E100 को जैसे ही मंजूरी मिली उसके बाद से लोगों के मन में कई तरह के सवाल आ रहें हैं जिसमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पुरानी गाड़ी में भी 100% एथेनॉल डाल सकते हैं. जिसके चलते आज इस खबर में हम इसी पर बात करेंगे और जानेंगे कि क्या सही है और क्या नहीं.
लगता है इंजन पुर्जों में जंग
आपको बता दें कि E100 का पुरानी गाड़ी में करना कई तरह के दिक्कत दे सकता है. क्योंकि एथेनॉल संक्षारक स्वभाव का होता है. पेट्रोल के मुकाबले एथेनॉल में नमी सोखने की क्षमता बहुत ज्यादा होती है और यह अधिक एसिडिक नेचर का होता है. नार्मल कारों के इंजन में एल्यूमीनियम, तांबा, और स्टील जैसे मेटल के अलावा फ्यूल पाइप, गैसकेट और सील्स बनाने के लिए सामान्य रबर या प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है.
जब इन सामान्य पुर्जों के संपर्क में लगातार E100 फ्यूल आता है तो उनमें तेजी से जंग लगने लगती है रबर गलने लगती है और फ्यूल लाइन में लीकेज की गंभीर समस्या पैदा हो सकती है. इस लिए पुरानी गाड़ी में E100 का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं.
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फ्यूल पंप का फेल होना
वहीं किसी भी गाड़ी का फ्यूल सिस्टम टैंक से लेकर इंजन तक पेट्रोल पहुंचाने का काम करता है. सामान्य गाड़ियों के फ्यूल पंप और इंजेक्टर्स को केवल पेट्रोल या अधिकतम E20 तक के मिश्रण के हिसाब से ट्यून और लुब्रिकेटेड किया जाता है. शुद्ध एथेनॉल (E100) का लुब्रिकेशन इंडेक्स पेट्रोल की तुलना में काफी कम होता है.
जब बिना किसी बदलाव के सामान्य फ्यूल पंप से E100 जाता है तो वह बहुत जल्दी घिसकर खराब हो जाता है. इसके अलावा एथेनॉल के कारण टैंक के अंदर कचरा या मैल जमने लगता है. जो फ्यूल इंजेक्टर्स को जाम कर देता है और गाड़ी बीच रास्ते में ही बंद हो सकती है.
इंजन की परफॉर्मेंस घटना
बता दें कि एथेनॉल और पेट्रोल की रासायनिक बनावट में एक और बड़ा फर्क उनके एनर्जी डेंसिटी का होता है. पेट्रोल के मुकाबले एथेनॉल में एनर्जी कम होती है जिसका मतलब है कि गाड़ी को उतनी ही ताकत पैदा करने के लिए ज्यादा मात्रा में एथेनॉल की जरूरत पड़ती है.
सामान्य गाड़ियों का इंजन कंट्रोल यूनिट और ऑक्सीजन सेंसर पेट्रोल के हिसाब से एयर-फ्यूल मिक्सचर सेट करते हैं. अगर ऐसे इंजन में E100 डाला जाए तो एयर-फ्यूल रेशो पूरी तरह से बिगड़ जाता है. गाड़ी ठीक से स्टार्ट नहीं होती, पिकअप खत्म हो जाता है और माइलेज बहुत ज्यादा गिर जाता है.
फ्लेक्स फ्यूल इंजन करता है काम
जानकारी दें दे कि इन्हीं सभी समस्याओं से पार पाने के लिए ऑटोमोबाइल कंपनियां फ्लेक्स-फ्यूल इंजन का निर्माण करती हैं. फ्लेक्स-फ्यूल कारों के इंजन में स्टेनलेस स्टील के मजबूत फ्यूल टैंक, फ्यूल लाइन्स, मजबूत वॉल्व, और एक स्मार्ट सेंसर लगा होता है जो फ्यूल की क्वालिटी को पहचानकर इंजन की ट्यूनिंग खुद-ब-खुद बदल देता है. इसलिए जब तक आपकी गाड़ी विशेष रूप से E100 कंपैटिबल न हो उसमें सामान्य पेट्रोल का ही इस्तेमाल करना सुरक्षित रहता है.
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