आजकल इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन एक सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि ये गाड़ियां इतनी भारी क्यों होती हैं. इसका सबसे बड़ा कारण इनकी बैटरी होती है. EV में लगी बैटरी काफी बड़ी और भारी होती है, जिसका वजन लगभग 300 से 500 किलो तक हो सकता है. अगर हम इलेक्ट्रिक कारों की तुलना पेट्रोल या डीजल गाड़ियों से करें, तो EV लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक ज्यादा भारी होती हैं. उदाहरण के तौर पर इलेक्ट्रिक SUV जैसे Hyundai Creta EV या Kia Clavis EV अपने पेट्रोल वर्जन से काफी ज्यादा वजनदार होती हैं.

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यह एक्स्ट्रा वजन गाड़ी के पूरे ड्राइविंग एक्सपीरियंस को बदल देता है. इसलिए कंपनियां अब नई तकनीक का इस्तेमाल करके इस वजन को कम करने की कोशिश कर रही हैं.

कंपनियां वजन कम करने के लिए क्या कर रही हैं?

ऑटो कंपनियां अब “लाइटवेट इंजीनियरिंग” पर काम कर रही हैं, ताकि गाड़ियों का वजन कम किया जा सके. इसके लिए वे कंपोजिट मटेरियल का इस्तेमाल कर रही हैं, जो मजबूत होने के साथ-साथ हल्के भी होते हैं. इन मटेरियल में प्लास्टिक, ग्लास फाइबर जैसे पदार्थ शामिल होते हैं, जो धातु के मुकाबले हल्के होते हैं लेकिन मजबूती में कम नहीं होते. इसके अलावा कार के अंदर के कई हिस्सों जैसे ऑडियो सिस्टम और केबिन के पार्ट्स को भी हल्का बनाया जा रहा है. इससे न केवल गाड़ी का वजन कम होता है, बल्कि उसकी रेंज और परफॉर्मेंस भी बेहतर होती है.

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भारी EV के नुकसान क्या हैं?

EV का ज्यादा वजन कुछ मामलों में नुकसान भी दे सकता है. सबसे पहले, भारी गाड़ी को रोकने में ज्यादा दूरी लगती है, जिसे ब्रेकिंग डिस्टेंस कहा जाता है. इसका मतलब है कि अचानक ब्रेक लगाने पर गाड़ी को रुकने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है. दूसरा, ज्यादा वजन के कारण टायर पर ज्यादा दबाव पड़ता है, जिससे टायर जल्दी घिस सकते हैं. इससे मेंटेनेंस का खर्च बढ़ सकता है. तीसरा, भारी होने की वजह से गाड़ी की फुर्ती थोड़ी कम हो जाती है. यानी स्पोर्टी ड्राइविंग का एक्सपीरियंस थोड़ा कम मिल सकता है.

क्या ज्यादा वजन फायदेमंद भी है?

EV का वजन सिर्फ नुकसान ही नहीं देता, बल्कि इसके कई फायदे भी हैं. सबसे बड़ा फायदा है बेहतर स्थिरता. बैटरी गाड़ी के नीचे लगी होती है, जिससे उसका सेंटर ऑफ ग्रैविटी नीचे रहता है. इससे तेज स्पीड पर गाड़ी ज्यादा संतुलित रहती है और पलटने का खतरा कम हो जाता है. इसके अलावा ज्यादा वजन से सड़क पर पकड़ यानी ग्रिप बेहतर होती है, जिससे ड्राइविंग ज्यादा सुरक्षित बनती है. दुर्घटना की स्थिति में भी भारी गाड़ियां यात्रियों को बेहतर सुरक्षा दे सकती हैं. EV में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम भी होता है, जो ब्रेक लगाने के दौरान ऊर्जा को वापस बैटरी में भेजता है. इससे गाड़ी की एफिशिएंसी बढ़ती है.

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