Car Scrapping Process: जब हमारी पुरानी कार सड़क पर चलने लायक नहीं रह जाती या सरकार के नियमों के मुताबिक उसकी उम्र पूरी हो जाती है तो उसे स्क्रैप यानी कबाड़ में दे दिया जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि स्क्रैपिंग सेंटर जाने के बाद आपकी चहेती कार का क्या होता है. एक पूरी कार को कैसे कबाड़ में बदला जाता है और उसके एक-एक पार्ट्स को कैसे खत्म या रीसायकल किया जाता है.
हानिकारक लिक्विड्स को निकालना
कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद कार को मुख्य वर्कशॉप में लाया जाता है. यहां सबसे पहले कार के अंदर मौजूद सभी तरह के तेल और लिक्विड्स को बाहर निकाला जाता है. इसमें पेट्रोल या डीजल, इंजन ऑयल, ब्रेक ऑयल, कूलेंट और AC की गैस शामिल है. अगर इन्हें न निकाला जाए, तो कार को काटते समय आग लगने का खतरा रहता है और ये पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं. इन सभी केमिकल्स को सुरक्षित तरीके से रीसायकल किया जाता है.
किमती पार्टस को अलग करना
अब बारी आती है कार के एक-एक पुर्जे को खोलने की. मैकेनिक कार की बैटरी, सीएनजी सिलेंडर और सभी टायर बाहर निकाल लेते हैं. इसके बाद कार के अंदर की सीटें, स्टीयरिंग, म्यूजिक सिस्टम, कीमती मेटल से बना कैटेलिटिक कनवर्टर और हेडलाइट्स जैसी चीजें अलग की जाती हैं. जो पार्ट्स अच्छी स्थिति में होते हैं, उन्हें पुरानी गाड़ियों के मार्केट में दोबारा इस्तेमाल के लिए बेच दिया जाता है. कार का सबसे मुख्य हिस्सा उसका इंजन और गियरबॉक्स होता है. क्रेन और कटर मशीनों की मदद से इंजन को कार की बॉडी से अलग किया जाता है. इंजन में एल्युमीनियम, लोहा और तांबा भारी मात्रा में होता है. इसे फैक्ट्रियों में पिघलाने के लिए भेज दिया जाता है ताकि नया मेटल तैयार हो सके.
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रीसायकल और नई गाड़ियों का निर्माण
जब कार से रबर, प्लास्टिक, शीशा और इंजन जैसी सभी चीजें निकल जाती हैं, तो सिर्फ लोहे का एक खोखला ढांचा बचता है. इस ढांचे को एक बहुत बड़ी हाइड्रोलिक कंप्रेसर मशीन में डाला जाता है. यह मशीन पलक झपकते ही पूरी कार की बॉडी को दबाकर एक छोटे लोहे के टुकड़े या ब्लॉक के रूप में बदल देती है. इसके बाद इस लोहे के ब्लॉक को बड़ी-बड़ी भट्टियों में डालकर पिघलाया जाता है. फिर इस पिघले हुए लोहे से स्टील की नई चादरें बनाई जाती हैं. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इसी रीसायकल किए गए लोहे का इस्तेमाल दोबारा नई कारें, पुल या ट्रेन की पटरियां बनाने में किया जाता है.
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