आज के समय में गाड़ी चलाना हमारी डेली लाइफ का अहम हिस्सा बन चुका है. यह हमें सुविधा और समय की बचत देता है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है. सड़क पर सुरक्षित चलने के लिए ट्रैफिक नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है. इन्हीं नियमों में एक जरूरी नियम शराब पीकर गाड़ी न चलाना है. ड्रिंक एंड ड्राइव न केवल कानून के खिलाफ है बल्कि यह आपकी और दूसरों की जान के लिए भी बहुत खतरनाक साबित हो सकता है.

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मोटर वाहन अधिनियम 1988 के सेक्शन 185 के मुताबिक, शराब पीकर गाड़ी चलाना या ड्रग्स की हालत में ड्राइव करना गैरकानूनी है. अगर कोई शख्स शराब पीकर गाड़ी चलाता है और उसके खून में एल्कोहल की मात्रा तय सीमा से ज्यादा पाई जाती है, तो यह अपराध माना जाता है. शराब पीने के बाद इंसान की सोचने-समझने और प्रतिक्रिया देने की क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा काफी बढ़ जाता है. इसी वजह से सरकार ने इस पर सख्त नियम और दंड तय किए हैं. 

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ऐसे शख्स को भरना पड़ सकता है भारी जुर्माना

अगर कोई शख्स पहली बार शराब पीकर गाड़ी चलाते हुए पकड़ा जाता है तो उसे भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है या जेल भी हो सकती है. अगर वही व्यक्ति दोबारा ऐसा करता है तो सजा और भी ज्यादा कड़ी हो जाती है. इस नियम का पालन सभी प्रकार के वाहनों पर लागू होता है, चाहे वह बाइक हो, कार हो या कोई दूसरी गाड़ी हो. यूपी में शराब पीकर गाड़ी चलाने पर 10 हजार रुपये या 6 महीने की जेल का प्रावधान है. अगर वही शख्स दोबारा गलती करता है तो यह पेनल्टी 15 हजार और 2 साल की जेल भी हो सकती है. 

कैसे पुलिस करती है चेक?

जब ट्रैफिक पुलिस को शक होता है कि कोई व्यक्ति शराब पीकर गाड़ी चला रहा है, तो वे उसे रोककर जांच करते हैं. इसके लिए ब्रेथ एनालाइजर नाम की मशीन का यूज किया जाता है, जिसमें शख्स को फूंक मारनी होती है. इससे शरीर में एल्कोहल की मात्रा का पता चलता है. अगर मात्रा तय सीमा से ज्यादा होती है, तो तुरंत चालान काटा जाता है और जरूरत पड़ने पर व्यक्ति को गिरफ्तार भी किया जा सकता है.

ड्रिंक एंड ड्राइव का असर सिर्फ जुर्माने या सजा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव आपकी बीमा पॉलिसी पर भी पड़ता है. अगर आप इस अपराध में पकड़े जाते हैं तो बीमा कंपनी आपकी पॉलिसी महंगी कर सकती है या उसे रद्द भी कर सकती है. इससे भविष्य में बीमा लेना मुश्किल हो सकता है. 

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