आज के समय में गाड़ियों में नई टेक्नोलॉजी तेजी से आ रही है और टायर भी पहले से काफी बेहतर हो गए हैं. पहले जब टायर पंचर होता था तो गाड़ी तुरंत रुक जाती थी और स्टेपनी बदलनी पड़ती थी. लेकिन अब ट्यूबलेस टायर ने इस परेशानी को काफी कम कर दिया है. ये टायर पंचर होने के बाद भी कुछ दूरी तक चलते रहते हैं, जिससे ड्राइवर को तुरंत परेशानी नहीं होती.

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ट्यूबलेस टायर में हवा तुरंत क्यों नहीं निकलती?

ट्यूबलेस टायर के अंदर अलग से ट्यूब नहीं होती. इसके अंदर एक खास परत होती है जो हवा को बाहर जाने से रोकती है. साथ ही यह टायर रिम के साथ अच्छी तरह चिपका रहता है, जिससे हवा बाहर नहीं निकल पाती. जब इसमें कोई कील या पतली चीज चुभती है, तो वह उसी जगह फंसी रहती है और हवा धीरे-धीरे निकलती है. यही कारण है कि ट्यूबलेस टायर अचानक पंक्चर होकर पूरी तरह बैठ नहीं जाता.

पंचर होने पर कितनी दूर तक चल सकता है टायर?

अगर टायर में छोटी कील लगी हो और वह बाहर न निकली हो, तो गाड़ी को आराम से 50 से 100 किलोमीटर तक धीमी रफ्तार में चलाया जा सकता है. इस दौरान हवा धीरे-धीरे निकलती है, जिससे आपको पास के किसी पंक्चर की दुकान तक पहुंचने का समय मिल जाता है. लेकिन अगर टायर में बड़ा कट लग गया हो या हवा बहुत तेजी से निकल रही हो, तो गाड़ी चलाना सही नहीं होता. ऐसे में तुरंत गाड़ी रोक देना बेहतर होता है, वरना टायर और रिम दोनों खराब हो सकते हैं.

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ट्यूबलेस टायर के फायदे क्या हैं?

ट्यूबलेस टायर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें हवा धीरे निकलती है, जिससे गाड़ी पर नियंत्रण बना रहता है. ये टायर हल्के होते हैं, जिससे गाड़ी पर ज्यादा भार नहीं पड़ता और माइलेज भी थोड़ा बेहतर मिलता है. इनमें ज्यादा गर्मी नहीं बनती, इसलिए ये लंबे समय तक चलते हैं. इसके अलावा छोटे पंचर को बिना टायर निकाले ही आसानी से ठीक किया जा सकता है. यही वजह है कि आजकल ज्यादातर गाड़ियों में ट्यूबलेस टायर का इस्तेमाल किया जा रहा है.

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