Car Insurance Expired Challan Fine: अगर आपके पास कार हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. कई बार लोग बिजी रहने के चलते अपनी कार का इंश्योरेंस रिन्यू कराना भूल जाते हैं. लेकिन आपको बता दें कि सड़क पर बिना वैलिड इंश्योरेंस के ड्राइविंग करना एक गंभीर अपराध है. ऐसा करने पर आपको न सिर्फ भारी जुर्माना देना पड़ सकता है. बल्कि जेल जाने की नौबत भी आ सकती है.
ज्यादातर कार मालिक को ट्रैफिक रूल्स के इन सख्त प्रावधानों को सीरियसली नहीं लेते. लेकिन पॉलिसी लैप्स होने के बाद कार ड्राइव करना एक बहुत बड़ा रिस्क है, जिससे हर हाल में बचना चाहिए. जान लें ऐसा होने पर कितने का कटता है चालान और किन मुश्किलों में पड़ सकते हैं आप.
इंश्योरेंस न होने पर जुर्माना और लीगल एक्शन
बता दें कि, मोटर व्हीकल एक्ट के सेक्शन 196 के तहत बिना वैलिड इंश्योरेंस के गाड़ी चलाने पर काफी सख्त पेनल्टी तय की गई है. अगर ट्रैफिक पुलिस आपको पहली बार बिना कार इंश्योरेंस के पकड़ती है. तो आप पर 2000 का चालान लगाया जाएगा. इसके साथ ही इसमें 3 महीने तक की जेल या दोनों का प्रोविजन भी शामिल है.
अगर कोई ड्राइवर दूसरी बार या उसके बाद भी बिना इंश्योरेंस के गाड़ी चलाते हुए पकड़ा जाता है. तो चालान का अमाउंट बढ़कर 4000 हो जाता है. दोबारा पकड़े जाने पर भी 3 महीने तक की जेल की सजा का रूल है. इसके अलावा ट्रैफिक पुलिस के पास आपका ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड करने और गाड़ी को सीज करने की भी पावर होती है.
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चालान के अलावा होने वाले बड़े नुकसान
कार ओनर्स को यह समझना होगा कि इंश्योरेंस न होने पर नुकसान सिर्फ चालान के अमाउंट तक ही सीमित नहीं रहता. पॉलिसी एक्सपायर होने के बाद ड्राइविंग करने से कई और बड़े रिस्क भी जुड़े हैं:
थर्ड-पार्टी लायबिलिटी में अगर बिना इंश्योरेंस वाली कार से कोई एक्सीडेंट हो जाता है और किसी दूसरे पर्सन या प्रॉपर्टी को डैमेज होता है, तो क्लेम का पूरा फाइनेंशियल बर्डन कार ओनर को अकेले उठाना पड़ता है. यह अमाउंट लाखों में हो सकता है.
नो क्लेम बोनस का लॉस
आपको बता दें कि, अगर कार इंश्योरेंस पॉलिसी एक्सपायर होने के 90 दिनों के अंदर रिन्यू नहीं कराई गई, तो आपका कमाया हुआ 'नो क्लेम बोनस' जीरो हो जाएगा. इससे आपको अगले प्रीमियम पर मिलने वाला 20% से 50% तक का डिस्काउंट नहीं मिलेगा.
ओन डैमेज कवर खत्म: एक्सीडेंट की कंडीशन में कार के रिपेयर का 100% खर्च आपको खुद उठाना होगा, क्योंकि इंश्योरेंस कंपनियां एक्सपायर्ड पीरियड का कोई भी क्लेम सेटल नहीं करती हैं.
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