Toll Plaza Waiting Time: हमारे देश में अब पहले के मुकाबले हाईवे और एक्सप्रेसवे बहुत तेजी से बन रहे हैं. जबकि कई शहरों में एक्सप्रेसवे और हाईवे बनने से लोगों का सफर में काफी समय बच रहा है. लेकिन राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले करोड़ों वाहन चालकों के लिए टोल प्लाजा की लंबी कतारें हमेशा से सबसे बड़ी समस्या रही हैं. अक्सर लोगों को टोल बूथ पार करने के लिए मिनटों तक गाड़ियों के इंजन ऑन रखकर लाइन में खड़े रहना पड़ता था. इससे न सिर्फ फ्यूल की खपत बढ़ती थी बल्कि यात्रियों का कीमती समय भी बर्बाद होता था. जिसके बाद संसद में उठाए गए इस सवाल के जवाब में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस समस्या पर सरकार की आधिकारिक रिपोर्ट देश के सामने रखी.

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बता दें कि, सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए आंकड़ों के मुताबिक, नेशनल हाईवे पर डिजिटल भुगतान व्यवस्था यानी फास्टैग लागू होने के बाद से स्थिति में व्यापक सुधार दर्ज किया गया है. जहां पहले गाड़ियों को टोल पार करने में औसत 12 मिनट का समय लगता था. वहीं अब यह समय घटकर केवल 40 से 47 सेकंड रह गया है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा कराए गए इम्पैक्ट असेसमेंट अध्ययन से साफ हुआ है कि इस व्यवस्था से सफर काफी आसान हुआ है.

FASTag व्यवस्था ने बदली रफ्तार  

बता दें कि, डिजिटल इंडिया मिशन के तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्गों पर FASTag प्रणाली को अनिवार्य रूप से लागू किया गया था. पहले कैश लेनदेन के कारण टोल प्लाजा पर गाड़ियों की लंबी कतारें लगी रहती थीं. जिससे ट्रैफिक जाम होना एक आम बात थी.

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संसद में ताजा जानकारी देते हुए परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया कि रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन आधारित इस तकनीक के आने के बाद से वाहनों का आवागमन बहुत तेज हुआ है. टोल प्लाजा पर ऑटोमैटिक स्कैनिंग सिस्टम के जरिए यूजर फीस की कटौती होने से अब गाड़ियों को ज्यादा देर रुकना नहीं पड़ता. इससे देश में लॉजिस्टिक्स और दैनिक यात्रा में लगने वाले समय की भारी बचत हो रही है.

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फ्यूल और समय की हो रही बचत

आपको बता दें कि, टोल बूथों पर वेटिंग टाइम कम होने का फायदा पर्यावरण और यात्रियों की जेब दोनों पर दिखाई दे रहा है. जब गाड़ियां टोल पर 10 से 12 मिनट तक चालू हालत में खड़ी रहती थीं तब हर साल अरबों रुपये का पेट्रोल और डीजल बेवजह जल जाता था.  

जबकि सरकार के जवाब के अनुसार, फास्टैग से गाड़ियों के ईंधन की खपत कम हुई है और कॉर्बन उत्सर्जन पर भी लगाम लगा है. इसके अलावा, टोल जमा करने में पारदर्शिता आने के कारण एनएचएआई के राजस्व में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यात्रियों को अब यात्रा की कुल समय-सीमा तय करने में पहले जैसी अनिश्चितता का सामना नहीं करना पड़ता.

तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के प्रयास जारी 

अभी भले ही औसत वेटिंग टाइम में भारी गिरावट आई है लेकिन मंत्री गडकरी ने यह भी माना है कि कुछ मौकों पर वाहन चालकों को असुविधा झेलनी पड़ती है. स्कैनिंग सिस्टम में खराबी, सर्वर डाउन होने, या ब्लैकलिस्टेड टैग जैसी तकनीकी वजहों से कभी-कभी किसी लेन में गाड़ियां काफी देर तक रुक जाती हैं.  

लेकिन इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने टोल प्लाजा ऑपरेटरों को सख्त निर्देश जारी किए हैं. NHAI लगातार लेन मॉनिटरिंग और हाई-स्पीड कैमरों को अपडेट कर रहा है. ताकि सर्वर संबंधी कमियों को तुरंत ठीक किया जा सके. इसके साथ ही हाईवे पर 100 मीटर से ज्यादा लंबी कतार न बनने देने के नियमों का भी कड़ाई से पालन कराया जा रहा है.

बैरियर भी जल्द हटेंगे 

बता दें कि, वेटिंग टाइम को पूरी तरह से जीरो करने के उद्देश्य से सरकार अब अगली पीढ़ी की तकनीक पर तेजी से काम कर रही है. नितिन गडकरी ने संसद को अवगत कराया कि आने वाले समय में देश भर के राजमार्गों को ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम आधारित टोलिंग से जोड़ा जाएगा.  

इस नई प्रणाली के लागू होने के बाद हाईवे पर पारंपरिक टोल प्लाजा और बूम बैरियर्स की जरूरत खत्म हो जाएगी. वाहन चालक अपनी गाड़ी जितनी दूरी तक चलाएंगे, सैटेलाइट के जरिए उतना ही टोल अपने आप उनके बैंक खाते से कट जाएगा. इस तकनीक के पूरी तरह शुरू होने के बाद टोल प्लाजा पर 1 सेकंड का भी वेटिंग टाइम नहीं रहेगा.

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