देश में बढ़ती पेट्रोल और डीजल की कीमतों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा कदम उठाया है. ईंधन बचाने की दिशा में अब प्रधानमंत्री ने खुद उदाहरण पेश किया है. जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी ने अपने काफिले में चलने वाली गाड़ियों की संख्या लगभग आधी कर दी है. इस फैसले का मकसद सिर्फ तेल बचाना ही नहीं, बल्कि लोगों को भी जागरूक करना है. आइए जानते हैं कि इससे कितना पेट्रोल-डीजल बचेगा.

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पहले कितनी गाड़ियां चलती थीं?

प्रधानमंत्री के काफिले में आमतौर पर कई सुरक्षा और सपोर्ट वाहन शामिल होते हैं. इनमें एसयूवी, सुरक्षा वाहन, एंबुलेंस और तकनीकी सहायता वाली गाड़ियां शामिल रहती हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पहले पीएम के काफिले में करीब 18 से 20 गाड़ियां चलती थीं. अब इसे घटाकर लगभग 9 से 10 वाहन कर दिया गया है. हालांकि सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी नहीं की गई है.

कितना तेल खर्च होता था?

प्रधानमंत्री के काफिले में इस्तेमाल होने वाली ज्यादातर गाड़ियां बड़ी एसयूवी होती हैं, जो औसतन 6 से 8 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती हैं. अगर एक दौरे में काफिला 100 किलोमीटर चलता है, तो पहले करीब 250 से 300 लीटर तक ईंधन खर्च हो जाता था. अब गाड़ियों की संख्या कम होने से यह खपत लगभग आधी हो सकती है. अनुमान के अनुसार हर दौरे में 100 से 150 लीटर तक ईंधन की बचत संभव है. अगर सालभर के सरकारी दौरों को देखा जाए तो इससे हजारों लीटर पेट्रोल और डीजल बचाया जा सकता है.

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इलेक्ट्रिक वाहनों को भी मिलेगा बढ़ावा

सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी ने यह निर्देश भी दिए हैं कि जहां संभव हो वहां काफिले में इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल किया जाए. इससे पेट्रोल-डीजल की खपत और कम होगी. साथ ही पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा. सरकार बिना नए वाहन खरीदे मौजूदा सिस्टम में ही ईवी को शामिल करने की तैयारी कर रही है.

आम लोगों से भी की अपील

प्रधानमंत्री मोदी पहले भी लोगों से तेल बचाने की अपील कर चुके हैं. उन्होंने कहा था कि ज्यादा से ज्यादा मेट्रो, रेलवे और कार पूलिंग का इस्तेमाल करना चाहिए. जिन लोगों के पास इलेक्ट्रिक वाहन हैं, उन्हें उनका ज्यादा उपयोग करना चाहिए. उन्होंने वर्क फ्रॉम होम को भी बेहतर विकल्प बताया था. पीएम मोदी की यह पहल दिखाती है कि अगर देश का हर नागरिक थोड़ी कोशिश करे, तो ईंधन बचाने के साथ-साथ देश की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत बनाया जा सकता है.

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