पेट्रोल-डीजल के मुकाबले क्या मजबूत ऑप्शन हैं इलेक्ट्रिक कारें? जानिए क्या कहती है सेल्स रिपोर्ट
Petrol-Diesel vs EVs: भारत में इस समय इलेक्ट्रिक कारों का मार्केट शेयर करीब 5 से 6 फीसदी के आसपास है. यानी हर 100 कारों में सिर्फ 5 या 6 ही इलेक्ट्रिक होती हैं. आइए डिटेल्स जानते हैं.

भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर पिछले कुछ सालों में काफी चर्चा बढ़ी है. सरकार लगातार लोगों को पेट्रोल-डीजल की जगह इलेक्ट्रिक गाड़ियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, ताकि प्रदूषण कम हो और फ्यूल पर भी निर्भरता घटे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई बार EV अपनाने की अपील की है. इसके बावजूद जब असली बिक्री के आंकड़े सामने आते हैं तो पता चलता है कि आज भी ज्यादातर लोग पेट्रोल, डीजल और CNG कारों को ही ज्यादा पसंद कर रहे हैं. इलेक्ट्रिक कारें अभी भी भारतीय बाजार में बहुत छोटा हिस्सा रखती हैं.
भारत में इस समय इलेक्ट्रिक कारों का मार्केट शेयर करीब 5 से 6 फीसदी के आसपास है. यानी हर 100 कारों में सिर्फ 5 या 6 ही इलेक्ट्रिक होती हैं.बाकी ग्राहक अभी भी पेट्रोल, डीजल या CNG गाड़ियों पर भरोसा कर रहे हैं. खासकर मारुति सुजुकी जैसी कंपनियों की पेट्रोल और CNG कारों की मांग सबसे ज्यादा बनी हुई है. हालांकि EV की बिक्री धीरे-धीरे बढ़ रही है, लेकिन वह अभी नॉर्मल फ्यूल वाली कारों को टक्कर देने की स्थिति में नहीं पहुंच पाई है.
लोगों को रेंज एंजायटी का डर
भारत में EV को लेकर लोगों का भरोसा पूरी तरह नहीं बन पाया है. कई लोग इलेक्ट्रिक कार को सेकंड कार के रूप में देखते हैं, लेकिन पहली और मुख्य कार के तौर पर खरीदने से अभी भी हिचकिचाते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह रेंज एंजायटी है यानी लोगों को डर रहता है कि कहीं बीच रास्ते में बैटरी खत्म न हो जाए. पेट्रोल पंप की तरह हर जगह चार्जिंग स्टेशन मौजूद नहीं हैं और फास्ट चार्जिंग नेटवर्क भी अभी सीमित है.यही कारण है कि लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोग अभी पेट्रोल या डीजल कार को ज्यादा सेफ ऑप्शन मानते हैं.
इसके अलावा कीमत भी एक बड़ा कारण है. भारत में अच्छी बैटरी रेंज वाली इलेक्ट्रिक कारें काफी महंगी हैं.अगर कोई ग्राहक 400 से 500 किलोमीटर की रेंज वाली EV खरीदना चाहता है, तो उसे करीब 20 से 30 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं.आम भारतीय ग्राहकों के लिए यह कीमत काफी ज्यादा मानी जाती है.वहीं पेट्रोल या CNG कारें कम कीमत में आसानी से मिल जाती हैं..इसलिए मध्यम वर्ग के लोग अभी भी पारंपरिक कारों को ज्यादा महत्व दे रहे हैं.
क्या है इलेक्ट्रिक कारों का फायदा?
इलेक्ट्रिक कारों की सबसे बड़ी ताकत उनकी कम रनिंग कॉस्ट है. रिपोर्ट के मुताबिक, घर पर चार्ज करने पर EV चलाने का खर्च करीब 1 से 2 रुपये प्रति किलोमीटर आता है.वहीं फास्ट चार्जिंग स्टेशन पर भी खर्च 2 से 3 रुपये प्रति किलोमीटर के आसपास रहता है.इसके मुकाबले पेट्रोल, डीजल और CNG कारों में यह खर्च 4 से 10 रुपये प्रति किलोमीटर तक पहुंच जाता है.यानी लंबे समय में EV काफी पैसे बचा सकती है.लेकिन शुरुआती कीमत ज्यादा होने की वजह से कई ग्राहक अभी भी EV खरीदने से बचते हैं.
EV बाजार पूरी तरह कमजोर नहीं है. पिछले कुछ सालों में Tata Motors, Mahindra, MG Motor और Hyundai जैसी कंपनियों ने नई इलेक्ट्रिक कारें लॉन्च की हैं. इससे लोगों की रुचि बढ़ी है और धीरे-धीरे EV की बिक्री भी ऊपर जा रही है. कई देशों में तो EV की बिक्री पेट्रोल कारों के करीब पहुंच चुकी है, लेकिन भारत में अभी यह बदलाव आने में समय लग सकता है. यहां चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बैटरी टेक्नोलॉजी और कीमतों में सुधार होने के बाद ही EV बड़े लेवल पर पॉपुलर हो पाएंगी.
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