WagonR Converted to Electric Car: इन दिनों पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं. जिसके चलते अब इलेक्ट्रिक गाड़ियों की डिमांड बहुत तेजी से बढ़ रही है. हालांकि अभी नई इलेक्ट्रिक कार खरीदना हर किसी के बजट में फिट नहीं बैठता है. क्योंकि नई EV कार अभी काफी महंगी बिकती है जिसके चलते अभी हर कोई इसे नहीं खरीद पा रहे हैं. लेकिन इस बीच एक ऐसी खबर सामने आई है. जिसने सभी को हैरान कर दिया है.

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दरअसल मध्य प्रदेश की एक वर्कशॉप ने 2009 मॉडल की 17 साल पुरानी मारुति सुजुकी वैगनआर को सिर्फ 2.25 लाख रुपये के खर्चे में एक शानदार इलेक्ट्रिक कार में बदल दिया है. जैसे ही यह खबर सामने आई है उसके बाद से सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या 15 साल की कानूनी मियाद पूरी कर चुकी पेट्रोल या डीजल गाड़ी को इलेक्ट्रिक में बदलने के बाद सड़कों पर कानूनी रूप से चलाया जा सकता है या नहीं. तो चलिए जानते हैं पुरानी गाड़ियों को ईवी में बदलने से जुड़े कानूनी नियमों के बारें में.

2.25 लाख रुपये में तैयार हुई वैगनआर

आपको बता दें कि भोपाल की एक वर्कशॉप ने वैगनआर के बोनट के अंदर इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी सेटअप को फिट कर दिया. लेकिन कार के पुराने 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स को रखा है और उसे एक कस्टमाइज्ड प्लेट के जरिए इलेक्ट्रिक मोटर से जोड़ा गया है.

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जबकि इसके अलावा एसी कंप्रेसर को चालू रखने के लिए ई-रिक्शा में इस्तेमाल होने वाली 1 kW की अलग मोटर लगाई गई है. जिससे कार खड़ी रहने पर भी कूलिंग मिलती रहती है. वहीं कार के परफॉर्मेंस की बात करें तो यह कन्वर्टेड वैगनआर एक बार फुल चार्ज होने पर सड़क पर आसानी से 100 से 110 किलोमीटर तक की ड्राइविंग रेंज दे देती है.

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क्या 15 साल पुरानी गाड़ी चलाना कानूनी है?

अब आते हैं सबसे बड़े सवाल पर कि क्या 15 साल पुरानी गाड़ी ईवी बनने के बाद वैलिड मानी जाती है. तो इसका जवाब है हा. भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय MoRTH और केंद्रीय मोटर वाहन नियम CMVR, Rule 12B/47A के तहत पुरानी पेट्रोल और डीजल गाड़ियों में इलेक्ट्रिक कन्वर्जन कराने की अनुमति दी गई है.

जानकारी दें दे कि अगर आप अपनी पुरानी गाड़ी को इलेक्ट्रिक में बदलते हैं तो उसे स्क्रैप में भेजने के बजाय एक नया जीवन मिल जाता है. लेकिन इसके लिए सबसे पहली शर्त यह है कि गाड़ी में इस्तेमाल की जाने वाली ईवी कन्वर्जन किट सरकार की मान्यता प्राप्त एजेंसियों द्वारा एप्रोव्ड होनी चाहिए. क्योंकि बिना अप्रूवल वाली लोकल या चाइनीज किट से गाड़ी कन्वर्ट कराना पूरी तरह से गैर-कानूनी है और ऐसी गाड़ी पकड़े जाने पर जब्त की जा सकती है.

खर्च और री-रजिस्ट्रेशन के नियम

आपको बता दें कि सिर्फ वर्कशॉप में किट लगवा लेना ही काफी नहीं होता है इसके बाद गाड़ी को आरटीओ से पास कराना सबसे जरूरी स्टेप होता है. कन्वर्जन का काम पूरा होने के बाद गाड़ी को आरटीओ इंस्पेक्टर के पास चेकिंग के लिए ले जाना पड़ता है. वहां गाड़ी के आरसी में फ्यूल टाइप को पेट्रोल से बदलकर इलेक्ट्रिक में बदला जाता है. इसके साथ ही गाड़ी का नया रजिस्ट्रेशन कार्ड जारी होता है और आरटीओ से हरी नंबर प्लेट अलॉट की जाती है. इस आरटीओ प्रोसेस और कागजी कार्रवाई का खर्च करीब 20,000 से 25,000 रुपये तक आता है.

इन बातों का रखें ध्यान

आप अपनी पुरानी गाड़ी को इलेक्ट्रिक बनाने का फैसला केवल शुरुआती 2.25 लाख रुपये का खर्च देखकर न लें. सबसे पहले यह चेक कर लें कि जिस वर्कशॉप से आप काम करा रहे हैं वह एक अधिकृत रेट्रोफिटमेंट सेंटर हो. जबकि दूसरा किट के साथ मिलने वाली बैटरी की वारंटी और उसकी लाइफ के बारे में पूरी जानकारी लें क्योंकि कुछ सालों बाद बैटरी बदलने का खर्च काफी ज्यादा होता है.

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