भारत में पिछले कुछ सालों में एक्सप्रेसवे और हाईवे का तेजी से विकास हुआ है. अब लोग लंबी दूरी का सफर कम समय में पूरा कर पा रहे हैं. बेहतर सड़कें, कम ट्रैफिक और ज्यादा स्पीड के चलते एक्सप्रेसवे यात्रियों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं. लेकिन इन सुविधाओं के साथ टोल का खर्च भी बढ़ा है. कुछ एक्सप्रेसवे ऐसे हैं जहां सफर करने के लिए यात्रियों को देश के सबसे ज्यादा टोल शुल्क का भुगतान करना पड़ता है.

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मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का खलापुर टोल प्लाजा सबसे महंगे टोल पॉइंट्स में शामिल है. देश के सबसे महंगे टोल प्लाजा की बात करें तो महाराष्ट्र का खलापुर टोल प्लाजा काफी चर्चा में रहता है. यह मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर मौजूद है. इस एक्सप्रेसवे की लंबाई करीब 94.5 किलोमीटर है और यहां कार से एक तरफ का सफर करने पर लगभग 320 रुपये तक का टोल देना पड़ सकता है. इस टोल में पूरे एक्सप्रेसवे के इस्तेमाल की फीस शामिल होती है.

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अटल सेतु एक्सप्रेसवे पर कितना टोल?

  • मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे देश के सबसे बिजी एक्सप्रेसवे में से एक है. यहां रोजाना बड़ी संख्या में गाड़ियां चलती हैं .पहाड़ी इलाकों में सड़क निर्माण, रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था पर ज्यादा खर्च होने के चलते यहां टोल दरें भी ज्यादा रखी गई हैं.
  • मुंबई और नवी मुंबई को जोड़ने वाला अटल बिहारी वाजपेयी सेवरी-न्हावा शेवा अटल सेतु भी देश के महंगे टोल प्लाजाओं में शामिल है. यह भारत का सबसे लंबा समुद्री पुल है और इसकी लंबाई करीब 21.8 किलोमीटर है. इस पुल से कार से सफर करने पर लगभग 250 रुपये तक का टोल लिया जाता है.
  • अटल सेतु को मॉडर्न इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण माना जाता है. इस पुल से मुंबई और नवी मुंबई के बीच सफर का समय काफी कम हो गया है. हालांकि, इस सुविधा के बदले यात्रियों को ज्यादा टोल फीस देनी पड़ती है.ॉ

एक्सप्रेसवे पर टोल इतना ज्यादा क्यों होता है?

  • एक्सप्रेसवे बनाने में सामान्य सड़कों की तुलना में काफी ज्यादा खर्च आता है. इन सड़कों को ज्यादा स्पीड, बेहतर सुरक्षा, कम मोड़ और प्रवेश-निकास व्यवस्था के साथ तैयार किया जाता है. निर्माण लागत, जमीन अधिग्रहण, मरम्मत और लंबे समय तक रखरखाव का खर्च टोल शुल्क तय करने में बड़ी भूमिका निभाता है.
  • इसके अलावा एक्सप्रेसवे पर यात्रियों को कई सुविधाएं भी मिलती हैं, जैसे बेहतर सड़क क्वालिटी, इमरजेंसी सेवाएं, पेट्रोल पंप, आराम क्षेत्र और तेज यात्रा. इन्हीं सुविधाओं के चलते इन रास्तों का टोल सामान्य हाईवे की तुलना में ज्यादा होता है.

क्यों बढ़ रही है एक्सप्रेसवे की मांग?

  • महंगे टोल के बावजूद लोग एक्सप्रेसवे को इसलिए पसंद कर रहे हैं क्योंकि इससे समय की बचत होती है. पहले जिन यात्राओं में कई घंटे लगते थे, वे अब काफी कम समय में पूरी हो रही हैं. व्यापार, पर्यटन और रोजाना यात्रा करने वाले लोगों के लिए ये सड़कें काफी उपयोगी साबित हो रही हैं.
  • हालांकि, रोजाना यात्रा करने वाले लोगों के लिए बढ़ता टोल खर्च चिंता का विषय भी है. खासकर उन लोगों के लिए जो रोजाना इन रास्तों का इस्तेमाल करते हैं, टोल का खर्च उनके कुल यात्रा बजट को प्रभावित करता है.

नई तकनीकों पर लगातार हो रहा काम

  • भारत में टोल वसूली को और आसान बनाने के लिए नई तकनीकों पर काम किया जा रहा है. इसमें FASTag, GPS आधारित सिस्टम और बिना रुके टोल भुगतान जैसी व्यवस्थाओं से यात्रियों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होती. इससे समय की बचत होने के साथ ही यात्रा ज्यादा सुविधाजनक बन रही है.
  • ऐसे में कहा जा सकता है कि देश में एक्सप्रेसवे तेजी से बढ़ रहे हैं और ये यात्रा को आसान बना रहे हैं. लेकिन इनकी सुविधा के साथ टोल खर्च भी एक बड़ा पहलू बन गया है. आने वाले सालों में बेहतर सड़क नेटवर्क और स्मार्ट टोल सिस्टम के बीच बैलेंस बनाना जरूरी होगा.

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