Morth New Rules: भारतीय ऑटोमोबाइल लगातार वर्ल्ड लेवल पर धमाल मचा रही है. क्योंकि, अब भारतीय ऑटो इंडस्ट्री द्वारा बनाई गयी कार भी दूसरे देशों में खूब बिक रहीं हैं. बता दें कि, जैसे-जैसे ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री आगे बढ़ रही हैं. वैसे-वैसे हमारी कारें और बाइक्स भी हाई-टेक हो रही हैं. उनमें इंटरनेट, ब्लूटूथ और स्क्रीन जैसी सुविधाएं बढ़ती जा रही हैं. लेकिन इस एडवांस टेक्नोलॉजी के साथ एक नया खतरा भी पनप गया है. गाड़ी हैक होने और डेटा चोरी होने का.
बता दें कि, अब चलती गाड़ी का सिस्टम हैक करके उसे रिमोटली कंट्रोल करना या लॉक तोड़ना चोरों के लिए आसान होता जा रहा है. जिसके चलते इस खतरे को बढ़ते देख अब सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय एक बेहद कड़ा और नया नियम लेकर आया है. बता दें की, सरकार ने एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है. जिसके तहत अब गाड़ियों की साइबर सुरक्षा और टाइमली सॉफ्टवेयर अपडेट को कानूनी रूप से अनिवार्य बनाया जा रहा है. चलिए समझते हैं विस्तार से इस खबर को.
केंद्रीय मोटर वाहन नियम में जुड़ेंगे दो नए कानून
बता दें कि, मिली ताजा रिपोर्ट के मुताबिक सरकार केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में दो नए प्रावधान नियम 125-T और नियम 125-U जोड़ने जा रही है. नियम 125-T सीधे तौर पर साइबर सिक्योरिटी से जुड़ा है. यह नियम यात्री वाहन M कैटेगरी, माल ढोने वाली गाड़ियां N कैटेगरी और ट्रेलर्स T कैटेगरी की ऐसी सभी गाड़ियां जिनमें कम से कम एक इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट यानी कंप्यूटर चिप लगी है.
उन्हें नए साइबर सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा. इसका मतलब यह हुआ कि अब कार कंपनियों को गाड़ी की डिजाइनिंग के वक्त से ही उसे हैकर-प्रूफ बनाना होगा और उस मॉडल को मार्केट में बेचने की मंजूरी ही नहीं मिलेगी.
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बिना सर्टिफिकेट के सड़कों पर नहीं उतरेंगी गाड़ियां
सरकार द्वारा बनाये जाने वाले नए नियम के मुताबिक सभी ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए एक मजबूत साइबर सिक्योरिटी मैनेजमेंट सिस्टम CSMS बनाना जरूरी हो जाएगा. यह एक ऐसा फुल-प्रूफ ढांचा होगा जो गाड़ी के सड़क पर रहने के पूरे लाइफ साइकिल के दौरान उस पर होने वाले डिजिटल हमलों और खतरों की पहचान करेगा और उन्हें तुरंत ठीक करेगा.
भारत के इस कदम के बाद हमारा देश भी यूरोपीय संघ, जापान और साउथ कोरिया जैसे विकसित देशों की लीग में शामिल हो जाएगा. जहां बिना साइबर सुरक्षा क्लीयरेंस और सुरक्षा सर्टिफिकेट के किसी भी स्मार्ट व्हीकल को मंजूरी नहीं दी जाती है.
OTA अपडेट का भी आया नियम
जबकि दूसरा कानून 125-U गाड़ियों के सॉफ्टवेयर अपडेट मैनेजमेंट से जुड़ा है. आजकल ज्यादातर आधुनिक कारों में मोबाइल की तरह घर बैठे-बैठे इंटरनेट से सॉफ्टवेयर अपडेट हो जाता है. नए नियम के तहत अब कंपनियों को यह गारंटी देनी होगी कि ये सॉफ्टवेयर अपडेट पूरी तरह से सुरक्षित रास्ते से भेजे जा रहे हैं ताकि अपडेट के बहाने कोई वायरस गाड़ी में न घुस सके.
सरकार इस पूरे नियम को अलग-अलग चरणों में लागू करेगी. इसकी शुरुआत 1 अक्टूबर 2026 से एडवांस लेवल-3 ऑटोमेशन वाली गाड़ियों से होगी और अक्टूबर 2029 तक सभी सॉफ्टवेयर और ओटीए वाली गाड़ियां इस दायरे में आ जाएंगी.
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