भारत में हाइब्रिड कारों की पॉपुलेरिटी लगातार बढ़ रही है और अब इस सेगमेंट में एक नया ऑप्शन आने जा रहा है. एमजी कल यानी 16 जुलाई 2026 को भारत में अपनी नई Hector Hawk Plug-in Hybrid से पर्दा उठाने वाली है. यह सिर्फ एक नई एसयूवी नहीं होगी बल्कि इंडियन मार्केट में प्लग-इन हाइब्रिड टेक्नोलॉजी को भी नई पहचान दे सकती है. अब तक ज्यादातर ग्राहकों के पास पेट्रोल, डीजल, इलेक्ट्रिक या फिर स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों का ऑप्शन था, लेकिन प्लग-इन हाइब्रिड इन सभी के बीच का एक बेहतरीन समाधान है.
दरअसल, प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV) ऐसी कार होती है जिसमें एक बड़ा बैटरी पैक और पेट्रोल इंजन दोनों दिए जाते हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कार को घर या चार्जिंग स्टेशन पर चार्ज भी किया जाग सकता है और जरूरत पड़ने पर इसमें पेट्रोल भरवाकर भी चलाया जा सकता है. यानी अगर बैटरी खत्म हो जाए तो यात्रा बीच में रुकने की चिंता नहीं रहती, क्योंकि पेट्रोल इंजन कार को आगे बढ़ाता रहता है.
क्या है दोनों में अंतर?
प्लग-इन हाइब्रिड और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड में सबसे बड़ा अंतर बैटरी का होता है. प्लग-इन हाइब्रिड में बड़ी बैटरी होने के चलते कार काफी लंबी दूरी तक सिर्फ इलेक्ट्रिक मोड में चल सकती है. यानी रोजाना ऑफिस आने-जाने या शहर के अंदर की ड्राइविंग बिना पेट्रोल खर्च किए भी की जा सकती है. इसके बाद जब लंबी यात्रा करनी हो तो पेट्रोल इंजन अपने आप काम करने लगता है.
स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कार Toyota Innova Hycross Hybrid की बात करें तो इसमें भी इलेक्ट्रिक मोटर होती है, लेकिन इसकी बैटरी छोटी होती है. इसलिए वह केवल थोड़ी देर और कम दूरी तक ही इलेक्ट्रिक मोड में चल पाती है. हालांकि स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड का फायदा यह है कि उसे अलग से चार्ज करने की जरूरत नहीं पड़ती. उसकी बैटरी ड्राइविंग के दौरान और ब्रेक लगाने पर अपने आप चार्ज होती रहती है. ऐसे में मालिक को सिर्फ पेट्रोल भरवाना होता है. यही वजह है कि प्लग-इन हाइब्रिड और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड दोनों की अपनी-अपनी खूबियां हैं.
लोगों की लगातार बढ़ी रही रुचि
भारत में फिलहाल हाइब्रिड कारों की संख्या ज्यादा नहीं है, लेकिन इन गाड़ियों को लेकर ग्राहकों की रुचि तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में MG Hector Hawk जैसी प्लग-इन हाइब्रिड एसयूवी का लॉन्च इस सेगमेंट को नई दिशा दे सकता है. यह टेक्नोलॉजी इलेक्ट्रिक कार और हाइब्रिड के बीच की दूरी को कम करती है. इसमें इलेक्ट्रिक कार जैसी अच्छी ड्राइविंग रेंज भी मिलती है और पेट्रोल इंजन होने की वजह से रेंज खत्म होने की चिंता भी नहीं रहती.
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