अगर आप कार चलाते हैं तो यह जानकारी आपके लिए बहुत काम की है. अक्सर लोग गाड़ी में हल्की-फुल्की दिक्कत देखते ही सीधे वर्कशॉप पहुंच जाते हैं, जहां बिना जरूरत के भी हजारों रुपये खर्च हो जाते हैं. लेकिन कई बार समस्या इतनी बड़ी नहीं होती. बस एक छोटे से सेंसर की वजह से पूरी गाड़ी की परफॉर्मेंस खराब होने लगती है. ऐसा ही एक अहम पार्ट MAF (Mass Air Flow) सेंसर भी है. 

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MAF सेंसर का काम बहुत जरूरी होता है. यह इंजन में जाने वाली हवा की मात्रा को मापता है. गाड़ी का इंजन सही तरीके से तभी काम करता है जब उसे सही मात्रा में हवा और फ्यूल मिले. यह सेंसर यह जानकारी गाड़ी के कंप्यूटर यानी ECU को भेजता है. इसके बाद ECU तय करता है कि इंजन में कितना पेट्रोल या डीजल जाना चाहिए. अगर यह बैलेंस सही रहे तो गाड़ी स्मूद चलती है और माइलेज भी अच्छा मिलता है.

ऐसे शुरू होती है समस्या?

  • समस्या तब शुरू होती है जब यह सेंसर धूल, मिट्टी या कार्बन की वजह से गंदा हो जाता है. गंदा होने पर यह गलत डेटा भेजने लगता है. इसका सीधा असर गाड़ी की परफॉर्मेंस पर पड़ता है. कई बार इंजन को लगता है कि ज्यादा हवा जा रही है या कम जा रही है और वह फ्यूल का गलत इस्तेमाल करने लगता है. इससे पेट्रोल या डीजल ज्यादा जलता है और माइलेज घट जाता है.
  • सबसे पहला संकेत काला धुआं निकलना होता है. जब इंजन में जरूरत से ज्यादा फ्यूल जलता है तो एग्जॉस्ट से काला धुआं आने लगता है. दूसरा संकेत पिकअप का कम हो जाना यानी आप एक्सीलेटर दबाते हैं, लेकिन गाड़ी पहले जैसी तेज नहीं चलती. ऐसा लगता है जैसे इंजन भारी हो गया हो.
  • तीसरा संकेत माइलेज का अचानक गिर जाना होता है. अगर आपकी गाड़ी पहले कम पेट्रोल में ज्यादा चलती थी और अब जल्दी फ्यूल खत्म हो रहा है तो यह भी एक संकेत हो सकता है.
  • चौथा संकेत स्पार्क प्लग का जल्दी खराब होना है, क्योंकि ज्यादा फ्यूल जलने से प्लग पर कार्बन जमने लगता है और सबसे आम संकेत डैशबोर्ड पर Check Engine लाइट का जलना है, जिसे लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. 

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