Maruti Challenges Consumer Court Order: भारत में एथेनॉल को लेकर हर तरफ बहस चल रही है और अब यह बहस बढ़ती ही दिख रही है. क्योंकि, अभी हाल ही में छत्तीसगढ़ के रायपुर जिला कंज्यूमर कोर्ट का एक फैसला हाल ही में खूब चर्चा में रहा.

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जबकि अब इसपर भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इस फैसले के आगे झुकने को तैयार नहीं है और उसने इस आदेश को मानने से साफ इनकार करते हुए कानूनी लड़ाई का ऐलान कर दिया है. चलिए जानतें हैं कि कंपनी ने इसके खिलाफ क्या बड़ा कदम उठाया है और उनकी क्या दलीलें हैं. 

उच्च अदालत में चुनौती देगी मारुति सुजुकी

बता दें कि, कंज्यूमर फोरम के सख्त आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए मारुति सुजुकी इंडिया ने आधिकारिक तौर पर साफ कर दिया है कि वह इस फैसले से बिल्कुल भी सहमत नहीं है. कंपनी का कहना है कि वे इस फैसले के खिलाफ कानून के मुताबिक सही और उच्च फोरम में अपील दायर करेंगे. 

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कंपनी का मानना है कि रायपुर जिला उपभोक्ता फोरम के इस आदेश में कई महत्वपूर्ण और तकनीकी तथ्यों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है. कंपनी इस मामले में  साबित होने के लिए अब वह इस कानूनी जंग को आगे बढ़ाएगी.

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मारुति ने किया बड़ा दावा 

रायपुर में कोर्ट के फैसले के बाद मारुति सुजुकी ने अपना बचाव करते हुए जो दलीलें दी हैं वे बेहद चौंकाने वाली हैं. क्योंकि कंपनी का दावा है कि पीड़ित ग्राहक की जो ग्रैंड विटारा कार थी वह पहले से ही पूरी तरह से E20 पेट्रोल के अनुकूल बनाई गई थी. कार के साथ मिलने वाले ओनर मैनुअल में भी इस बात का साफ-साफ जिक्र किया गया था. 

कंपनी का कहना  है कि गाड़ी के इंजन में खराबी पेट्रोल की क्वालिटी में एथेनॉल की वजह से नहीं आई है. बल्कि जांच के दौरान गाड़ी से जो पेट्रोल निकाला गया था उसमें बाहरी मिलावट या दूषित तत्व पाए जाने के पक्के सबूत मिले हैं.

अब आगे क्या होगा?

बता दें कि, देश के लाखों कार मालिकों की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि भारत में E20 पेट्रोल के आने के बाद से कई पुरानी और नई गाड़ियों में इंजन मिसफायरिंग और पार्ट्स खराब होने की खबरें आ रही हैं. 

अब जब यह मामला उच्च अदालत में जाएगा तो वहां होने वाले फैसले से यह पूरी तरह तय होगा कि भविष्य में अगर किसी गाड़ी का इंजन एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल से खराब होता है तो उसकी जिम्मेदारी तेल कंपनियों की होगी कार बनाने वाली कंपनियों की होगी या फिर खुद ग्राहक की. अब देखना होगा कि, अदालत क्या फैसला देता है. 

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